कविता ; मिलना मुश्किल होता है

छल का ऐसा ताना बाना मिलना मुश्किल होता है। मुझ जैसा कोई घाघ पुराना , मिलना…

कविता ;ना जाने मैं बदल सकूंगा

ना जाने मैं बदल सकूंगा , या कि खुद बदला जाऊंगा ? देख रहा हूं रीत…

कविता ; भगवान का उत्तर

  एक रात भगवान ने मुझे दर्शन दिया सपने में। आनन्दित हो उठा मैं। उन्होने बड़े…

कविता ; मैं कलम थामकर यूं ही बढ़ता गया —-

मैं कलम थामकर यूं ही बढ़ता गया , बेतहाशा ही किस्से मैं गढ़ता गया। थोड़ा सच…

कविता ; सब राजी – राजी छोड़ आया

  इक शर्त लगी थी जीवन से , जीता , फिर बाजी छोड़ आया , सब…

कविता ; अमृत

जीवन उसके हाथ मे है मैं भी उसके हाथ में हूँ जीवन मेरे हाथ में है…

कविता ; प्रेम

शब्दों के जाल तथा वाक्यों के ताने बाने से प्रेम का प्रदर्शन कर मग्न हो नाचते…

कृष्ण पक्ष

लुत्फे – शिकस्त इश्क में पाया जो इस कदर। जी चाहता है , हारता रह जाऊं…

वापसी

    शब्द हैं बेप्राण इनको मत बुलाइए मौन की आवाज पर चढ़ पास आइए। शर्म…

सफलता

वे छायावादी हैं दूसरों को लक्ष्य बनाकर प्रतिदिन मुझ पर व्यंगवाण चलाते हैं। ऐसा नहीं कि…