ओ सुंगध। तुम अगर अन्न होते तो मैं तुम्हें पकाकर खा जाता कहाँ है इतना धैर्य…
Category: कुछ नया
कविता ; हैं अश्रू धरोहर , मीत प्रिये ,
हैं अश्रू धरोहर , मीत प्रिये , हारी बाजी की जीत प्रिये। श्रुति दंत कथाओं में…
कविता ; मिलना मुश्किल होता है
छल का ऐसा ताना बाना मिलना मुश्किल होता है। मुझ जैसा कोई घाघ पुराना , मिलना…