गजल ; कौन नापा आज तक

  कह रहे हैं वो गगनचुंबी इमारत है मेरी हैं बड़े नादाँ गगन को कौन नापा…

गजल ; झूठ – सच

  जहाँ में झूठ इससे भी बड़ी होती है क्या कोई कि हम हर पल तुम्हें…

कविता ; जाएं तो जाएं कहाँ

  अब तो कॉम्पीटिशन कोई ऐसा चलाया जाए , जिसमें प्रतियोगी को प्रतियोगी बनाया जाए। जिसकी…

गजल  ; पूछा हमने बाबूलाल से

तिल तिल क्यों मरते हो ? पूछा हमने बाबूलाल से। बोले , गालों पर उनके दो…

कविता ; झूठी – खुशी

  मैंने बंद कर दिया पूछना हवाओं से फिजाओं से सूरज , चाँद तारों से अपने…

कविता ; खतराहीन

मैं कई बार कह चुका हूँ अपने साथियों से। अगर ईमान डिगाना ही है तो फुटकर…

कविता ; निर्बल कौन ?

  जंगल में जानवरों की एक बहुत बड़ी बैठक हुई बैठक में दो रखे गए प्रस्ताव…

कविता ; तलाश

  व्यक्ति जब व्यक्ति से कटता है फिर न जाने क्यों मेरे सीने में दर्द होने…

कविता ; पुरातन मोह

इतने साल बीत गए अभी भी करते हो अंग्रेजों के शासन का बखान सुशासन कहके। बड़े…

कविता ; समरथ के नहिं दोष

    मैंने दो तरह के कवि देखे हैं छोटा और बड़ा। छोटा बड़े की बनाई…