जहाँ में झूठ इससे भी बड़ी होती है क्या कोई
कि हम हर पल तुम्हें जाने – तमन्ना याद करते हैं।
मियाँ इस याद में एक बार आती याद बस एक ही
कहाँ आए कोई ? हम जब खुदा का ध्यान धरते हैं।
इसी दुनिया में माता है पिता है , भाई – बहनें हैं
तो कैसे झूठ बोले ? हम भी तो अल्ला से डरते हैं।
बुरा अंजाम होता है हर एक पल याद आने का
बिगड़ जाते हैं सारे काम जब हम आह भरते हैं।
खुदा ना झूठ बुलावाये तो , हाँ वो याद आते हैं
कुछ एक फुरसत के लम्हों में जो हम बिस्तर पे पड़ते हैं।
हमें आती है उनकी याद , हाँ जी भर के आती है
तभी जब आलमें – फुरकत में हम जिंदा ही मरते हैं।
उपरोक्त गजल स्वर्गीय बी एन झा द्वारा लिखित पुस्तक इन्द्रधनुष से ली गई है ।
