संबंधों में प्रेम कहां, अब तो रिश्ते अनुबंध हो गए

प्रतिक्षण धूमिल होती स्वासों पर अवसादों की सांकल है। पंख विहीन मरणासन्न पंछी की तरहां तन-मन…