आपकी सेहत ; स्ट्रोक स्वास्थ्य के लिये बड़ा खतरा।


मीमांसा डेस्क।

स्ट्रोक दुनियाभर में मृत्यु का दूसरा सबसे प्रमुख कारण है। यह एक तंत्रिका संबंधी बीमारी है , जिससे पीड़ित शारीरिक रूप से अक्षमता का सामना कर सकता है। दुनिया में विकलांगता का यह तीसरा मुख्य कारण है। खासकर भारत में स्ट्रोक के चलते जीवनभर विकलांगता से प्रभावितों की सख्यां  ज्यादा है ,  वहीं  इससे होने वाली मृत्यु दर भी अधिक है। एक आंकड़े के मुताबिक भारत में हर साल 1 लाख की जनसंख्या में लगभग 108 से 172 लोग स्ट्रोक से प्रभावित होते हैं। यह आंकड़े जाहिर करते हैं कि सचमुच यह स्वास्थ्य के लिये कितना बड़ा खतरा है। इसलिये आपके और आपके प्रियजनों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए , यह जानना महत्वपूर्ण है कि स्ट्रोक क्या है , इसके जोखिम कारक क्या हैं और लक्षणों को कैसे पहचानें।

स्वास्थ्य  विशेषज्ञों  के अनुसार , सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि स्ट्रोक के दौरान मस्तिष्क में क्या होता है। दरअसल , मस्तिष्क एक विशिष्ट अंग है जो सोच ,, स्मरण शक्ति , भावनाओं , स्पर्श मोटर स्किल्स , दृष्टि श्वास , तापमान , भूख और हमारे शरीर को नियंत्रित करने वाली सभी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। जब मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने वाली रक्त वाहिका या तो थक्के के कारण रूक जाती है या फट जाती है , तब स्ट्रोक होता है।

स्ट्रोक होने पर रक्त प्रवाह उस क्षेत्र तक नहीं पहुंच पाता है , जो विशेष शारीरिक क्रिया को नियंत्रित करता है तो तब शरीर का वह हिस्सा उस तरह काम नहीं करता जैसा उसे करना चाहिये। जैसे , यदि स्ट्रोक मस्तिष्क के पिछले हिस्से में होता है , तो संभावना है कि दृष्टि को प्रभावित करेगा।

स्ट्रोक का प्रभाव मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि अवरोध कहां है और मस्तिष्क के टिश्यू कितने प्रभावित हुए हैं। क्योंकि मस्तिष्क का एक हिस्सा शरीर के दूसरे हिस्से को नियंत्रित करता है , एक स्ट्रोक जो एक तरफ को प्रभावित करता है , उसके परिणामस्वरूप शरीर के प्रभावित हिस्से में तंत्रिका संबंधी परेशानी पैदा होंगी। स्ट्रोक के खतरे से बचा जा सकता है , जिसमें कुछ विशेष बातों पर अमल करने की जरूरत है , जैसे स्वस्थ जीवनशैली में बदलाव और स्ट्रोक के जोखिम कारकों को नियंत्रित करने के लिए अपने डॉक्टर के साथ मिलकर 80 प्रतिशत तक स्ट्रोक को रोका जा सकता है। वहीं स्ट्रोक की रोकथाम के लिए ध्रूमपान बंद करना सबसे छोटा और मुख्य कदम है।

  •   सिगरेट से बढ़ता है स्ट्रोक का खतरा

कई अध्ययनों से पता चलता है कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन पांच सिगरेट पीता है , तो उसमें स्ट्रोक होने का खतरा 12 प्रतिशत तक बढ़ जाता हैं। यह व्यापक रूप से समझा जाता है कि ध्रूमपान फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता है , लेकिन कई लोगों को यह एहसास नहीं है कि यह मस्तिष्क और रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचाता है।

इन बातों के ध्यान के साथ जीवन में सक्रिय रहना भी बेहद जरूरी है। एक शोघ के अनुसार , कार्यस्थल पर कुछ शारीरिक गतिविधि करने से कार्यस्थल पर निष्क्रिय रहने की तुलना में स्ट्रोक का खतरा 36 प्रतिशत तक कम होता है। खाली समय में कोई काम नहीं करने के बजाय अगर व्यायाम किया जाय तो बड़े स्ट्रोक के खतरे में 20 से 25 प्रतिशत की कमी हो सकती है। चलने को उत्तम व्यायाम में शामिल किया गया है। उठें और चारों और चलें।

  •  उच्च रक्तचाप से स्ट्रोक का खतरा

इसके अलावा , उच्च रक्तचाप से स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। इसके कारण मस्तिष्क तक जाने वाली धमनियों में रक्त के थक्के बन सकते हैं ,  जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो सकता है  और संभावित रूप से स्ट्रोक हो सकता है। नियमित रूप से डॉक्टर के पास जाकर रक्तचाप की निगरानी करें।

शारिरिक   निगरानी के साथ स्वस्थ जीवनशैली में आहार का विशेष स्थान है। ऐसे कई आहार हैं जो स्ट्रोक के खतरे को कम करते हैं , जैसे कि भरपूर मात्रा में फल , सब्जियां और कम वसा वाले डेयरी उत्पाद , साबुत अनाज , मछली और नट्स आदि।

  • वृद्धो और वयस्कों में भी हैं स्ट्रोक का खतरा

लगभग 10 से 15 प्रतिशत स्ट्रोक 50 या उससे कम उम्र के वयस्कों में होते हैं। हाल के शोघ से पता चलता है कि वृद्धो और वयस्कों में स्ट्रोक के मुख्य कारक उच्च रक्तचाप , उच्च कोलेस्ट्रॉल , मोटापा और मधुमेह हैं , वही युवाओं में स्ट्रोक के प्रमुख कारण बनते हैं। इसलिये बचपन से युवावस्था में कदम रखने वाले युवाओं को शुरुवात से ही अपने रक्तचाप , कोलेस्ट्रॉल ,ब्लड लिपिड और ब्लड ग्लूकोज की निगरानी करनी चाहिए।

स्ट्रोक होने पर तुरंत कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है। इसके लिये संक्षिप्त नाम याद रखें। बी – बैलेंस , ई – आईस , एफ – फेस , ए – आर्म , एस – स्पीच , टी – टाइम को दर्शाता है।

अगर अचानक व्यक्ति में संतुलन की कमी हो रही हो , उसकी दृष्टि में बदलाव दिख रहा हो , या देखने में परेशानी हो , मुस्कुराने पर चेहरे का एक हिस्सा झुक रहा हो , हाथ ऊपर करने पर एक हाथ नीचे की ओर जाए , व्यक्ति की बात अजीब सी प्रतीत हो तब बिना देर किये इनमें से कोई भी लक्षण देखने पर तुरंत आपत्कालीन सेवाओं को कॉल करें।

नोट – उपर्युक्त लेख का उद्देश्य जागरूकता से जुड़ी सामान्य जानकारी प्रदान करना है। ध्यान रखें यह चिकित्सीय सलाह नहीं है।

 

https://youtube.com/@vikalpmimansa

https://www.facebook.com/share/1BrB1YsqqF/