नई दिल्ली:
इंडिया हैबिटेट सेंटर और भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वावधान में ‘गहरी जड़ों से भारत की उड़ान’ (Rising Bharat From Deep Roots) विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह आयोजन IHC-ICPR के 12-महीने के दर्शन अध्ययन चक्र की दूसरी महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में गुलमोहर हॉल में संपन्न हुआ।
मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध शिक्षाविद और विचारक मुकुल कानिटकर ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का आधुनिक उत्थान और ‘विश्व गुरु’ बनने की यात्रा उसकी सनातन संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा की नींव पर ही आधारित है। स्वामी विवेकानंद जी के दर्शन का आधिकारिक विद्वान होने के नाते, मुकुल जी ने इस बात पर जोर दिया कि अपनी सांस्कृतिक ‘जड़ों’ से पोषण लेकर ही भारत भविष्य के अनंत आकाश में सफल ‘उड़ान’ भर सकता है। आदरणीय मुकुल जी ने अपने वक्तव्य में यह भी जोड़ा कि समस्त पाश्चात्य जगत और उनके आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक का मूल स्तंभ भारतीय संस्कृति के दार्शनिक सिद्धांतों का ही प्रतिबिंब है | विविधता के अथाह समुद्र में शाश्वत और विराट एकत्व को अनुभूत करना ही गहरी जड़ों से जुड़ना है | उनका यह वक्तव्य संघ की उस मूल विचारधारा को पुष्ट करता है कि राष्ट्र का सर्वांगीण विकास उसकी अपनी मिट्टी और पहचान से जुड़े होने में ही निहित है।
कार्यक्रम की संयोजक प्रो. बिंदु पुरी (सेंटर फॉर फिलॉसफी, जेएनयू) ने अपने वक्तव्य में कहा, यह व्याख्यान इस बात का प्रमाण है कि दर्शन शास्त्र का समाज और राष्ट्र निर्माण से सीधा संबंध है। ‘राइजिंग भारत’ की कल्पना तब तक अधूरी है जब तक हम अपनी ‘डीप रूट्स’ यानी अपनी वैचारिक गहराई को न समझें। इस अध्ययन चक्र के माध्यम से हम अकादमिक जगत में एक ऐसी नई विमर्श की शुरुआत कर रहे हैं जो छात्रों को अपनी मिट्टी और परंपराओं से गौरवान्वित होकर जुड़ना सिखाएगा।”
मीडिया संयोजक विजय जायसवाल ने कार्यक्रम की सफलता पर जानकारी साझा करते हुए कहा, “आज के इस आयोजन में भारी संख्या में बुद्धिजीवियों, शोधार्थियों और छात्रों ने हिस्सा लिया। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के. जी. सुरेश और छात्र संयोजक अनुपम ओंकार के नेतृत्व में आयोजित इस व्याख्यान ने न केवल वैचारिक स्पष्टता प्रदान की, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि देश का युवा अपनी संस्कृति और दर्शन को लेकर बेहद जिज्ञासु है। मीडिया के माध्यम से हम इस ज्ञान-यज्ञ और राष्ट्र-बोध के संदेश को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में CEC (UGC) के निदेशक प्रो. परीक्षित सिंह मन्हास उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ सत्र का समापन हुआ।