कविता ; सम्पाती बड़ा मशहूर है


नाप ली पर्वत की ऊंचाई अगर
आसमां तुझसे नहीं अब दूर है।

दे न सकता चाँद वह जीवन कोई
जिसने सूरज ने चुराई नूर है।

लड़खड़ाता दिख रहा जिसको जहाँ
हाय। वो खुद ही नशे में चूर है।

कल मिलेंगे खाक में उनको मगर
आज को खोना नहीं मंजूर है।

जब बुलाते बिजलियों को सर पे वो
आसमां कहता कि वो मजबूर है।

वो समेटे पंख बैठे रह गए
क्योंकि सम्पाती बड़ा मशहूर है।

उपरोक्त गजल स्वर्गीय बी एन झा द्वारा लिखित पुस्तक इन्द्रधनुष से ली गई है ।

 

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