सवालों के घेरे में व्यवस्था

नीट का पेपर जब ‘लीक’ हुआ,
हरेक सपना जैसे ‘ध्वस्त’ हुआ।
अथक मेहनत की रातें ‘रो’ पड़ीं,
ईमान की ‘राहें’ जैसे खोई पड़ीं।
जिस ‘शिक्षा’ पर था देश टिका,
वहीं भरोसे का एक दीप बुझा।
‘कागज़’ के कुछ टुकड़ों ने फिर,
लाखों का भविष्य उजाड़ दिया।
यूं अब सरकारों की ‘चौखट’ पर,
जनता का प्रश्नचिन्ह खड़ा होगा।
इस युग कैसे गोपनीय दीवारों से,
प्रश्न-पत्र बाहर फैला पड़ा होगा?
बच्चे ‘दिन-रात’ एक किये हुवे थे,
आशा-अपेक्षा लेकर आगे बढ़े थे।
क्यों उनकी आँखों के सपनों पर,
स्वार्थियों के काले रंग चढ़े हुए थे?
सीबीआई की कठोर ‘जांच’ चले,
सच्चाई के पहरे में हर द्वार खुले।
इसके ‘दोषी’ चाहे जितने बड़े हों,
न्याय के आगे उनका शीश झुके।
शिक्षा मंदिर कहलाता है देश का,
सबको इसका सम्मान बचाना है।
मेहनत करने वाले हरेक ‘मन’ को,
फिर विश्वास का दीप दिलाना है।
(संदर्भ – नीट यूजी-2026 पेपर लीक)
संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)