बंधुआ मजदूरी एवं बाल तस्करी पर हाल ही में दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब ऑफ इंडिया में SPID सोसाइटी द्वारा एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डॉ नवलेंद्र कुमार सिंह(स्पेशल डायरेक्टर महिला बाल विकास), अशोक कुमार झा(डॉ. ए बी बालिगा ट्रस्ट डायरेक्टर), ओपी व्यास(चेयरपर्सन सी डब्लू सी), वी. के राव(डिप्टी लेबर कमिश्नर), एडोवोकेट हेमराज, हनीफ उर रहमान (एडवोकेट), संजय गुप्ता(चेतना), जे बी ओली (बटरफ्लाई),नीता सिंह(आई जीसी ऍफ़), नंदिता बरुआ(एशिया फाउंडेशन), डॉ. रिद्धिमा सेठ (डी सी पी एसपी यू डब्लू ए सी दिल्ली पुलिस), शैलभ (हक़), ज्योति मनी(सिक्युरिटी कमिश्नर आर पी एफ) अवधेश यादव (सीईओ, स्पीड) उपस्थित रहे।
इस अवसर पर SPID के सीईओ अवधेश यादव ने बताया कि संस्था बंधुआ मजदूरी और बाल श्रम के मुद्दों पर जमीन से जुड़ी हुई है और पिछले 22 वर्षों से दिल्ली, हरियाणा जैसे क्षेत्रों में बाल तस्करी के खिलाफ और विशेष रूप से दिल्ली के जीबी रोड जैसे क्षेत्र में तस्करी के विरूद्ध काम कर रही है। उन्होंने कहा कि केवल कानून बनाना काफी नहीं है, बल्कि संवेदनशील होकर सिस्टम और समुदाय को एक साथ मिलकर काम करना होगा ताकि तस्करी मुक्त समाज बनाया जा सके।
गौरतलब है कि इस राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम में कानूनी व संवैधानिक चर्चा की गई जिनमें कुछ महत्वपूर्ण विषय जैसे कि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 21 (जीवन और गरिमा), और 23 (तस्करी और जबरन श्रम पर रोक) रहे।
चर्चा में यह बताया गया कि बंधुआ मजदूरी अधिनियम 1976: इस कानून के तहत अतिरिक्त मजिस्ट्रेट और डीएम के पास न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियां होती हैं। संबंधित मामले में त्वरित सुनवाई धारा 21 के तहत, 90 दिनों के भीतर निर्णय देने का प्रावधान है।
वहीं रेस्क्यू और फील्ड की चुनौतियां दिल दहला देने वाले मामले पर नजर डालें तो आनंद विहार स्टेशन और अन्य जगहों से बच्चों को बचाया गया। इस एक रेस्क्यू में पाया गया कि कारखाने में काम करने वाले 14 बच्चों की उंगलियां और टखने टूटे हुए थे।
तस्करी के नए तरीके और रेस्क्यू पर में जानकारी दी गई कि तस्कर अब स्लीपर क्लास में सीट रिजर्व करते हैं जबकि बच्चों को जनरल डिब्बों में रखा जाता है। रांची और मुंबई जैसे एयरपोर्ट्स से भी बच्चों का बचाव किया गया। इसके साथ ही तकनीकी सहायता के लिए CISF अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और व्यवहार पहचान के जरिए संदिग्धों की पहचान कर रही है।
चर्चा में पीड़ितों के लिए 20,000 रुपये के अंतरिम मुआवजे और केंद्रीय योजना 2016 के तहत वित्तीय सहायता की बात कही गई, वहीं कुछ सुझाव दिये गये, जिनमें बताया गया कि एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों में दोषसिद्धि की दर बहुत कम है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है। पुलिस, सीडब्ल्यूसी (CWC), रेलवे सुरक्षा बल (RPF), और एनजीओ के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है। साथ ही ग्राम स्तर और वार्ड स्तर पर समितियों को मजबूत करने और लोगों को कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने पर जोर दिया गया।