क्यों मनाया जाता हैं गणेश उत्सव

पूजा पपनेजा।

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार गणेश उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन गणपति बाबा को दस दिन के लिये घर लाया जाता है। जिसमें उन्हें मोदक व लड्डू का भोग लगाया जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि घर में गणेश जी के आने से सारे विघ्न खत्म हो जाते हैं। इसलिये भक्त भी इन दिनों गणेश जी की सच्चे दिल से सेवा करते है। अब आपको गणेश उत्सव मनाने के कारण बताते है।

 

  • गणेश उत्सव मनाने के पीछे की कहानी क्या है ?

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, माता पार्वती ने चंदन के लेप से भगवान गणेश की रचना की थी। उन्होंने गणेश जी को जीवन दिया था। वही एक बार की बात है कि नहाने से पहले माता पार्वती ने पुत्र गणेश को दरवाजे पर पहरा देने के लिए बोला था। तभी उसी समय भगवान शिव लौटे थे।

फिर उसके बाद भगवान शिव ने माता पार्वती से मिलने के लिये घर में प्रवेश करना चाहा तो गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। क्योंकि वे भगवान शिव को पहचानते नहीं थे। इससे नाराज होकर भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट दिया।

जिसके बाद माता पार्वती गणेश जी की चीख सुनकर बाहर आई। फिर जब देवी पार्वती ने यह सब देखा, तो वे बहुत क्रोधित हो गईं। उनकी क्रोध की अग्नि से सृष्टि में हाहाकार मच गया। तब सभी देवताओं ने शिवजी से बालक को पुनर्जीवित करने के लिए कहा।

माता पार्वती के इस प्रचंड क्रोध से सृष्टि के विनाश की संभावना को देखते हुए भगवान ब्रह्मा और विष्णु ने महादेव से विनती की कि वे माता को शांत करें। फिर महादेव ने तुरंत अपने अनुचरों इंद्र और नंदी को उत्तर दिशा में भेजा और कहा कि जो भी पहला जीव मिले और स्वेच्छा से अपना सिर दे, उसका सिर विनायक पर लगाया जाएगा। फिर इंद्र और नंदी को उत्तर दिशा में एक हाथी मिला, जिसका नाम गजअसुर था। गजअसुर एक बुद्धिमान और महान हाथी था, जिसे महादेव ने एक बार वरदान दिया था कि वह हमेशा कैलाश पर रहेगा। गजअसुर ने अपने सिर को सहर्ष इंद्र को सौंप दिया।

भगवान शिव ने गजअसुर के सिर को विनायक के शरीर पर लगा दिया और इस प्रकार विनायक का पुनर्जन्म हुआ। उनका नाम बदलकर गणेश रखा गया, जिसका अर्थ है “गणों के ईश्वर”। महादेव ने गणेश को वरदान दिया कि वे प्रथम पूज्य होंगे, अर्थात किसी भी धार्मिक या शुभ कार्य की शुरुआत गणेश की पूजा से होगी।

तभी से गणेश को विघ्नहर्ता और नए आरंभ का देवता माना जाने लगा। इसके अलावा यह भी कहा जाता है क‍ि वेद-व्यास जी ने गणेश भगवान से महाभारत ग्रंथ लिखने की प्रार्थना की थी, फिर उस दौरान भगवान गणेश ने 10 दिनों तक बिना रुके महाभारत लिख डाली, जिसकी वजह से गणेश जी का तापमान बढ़ गया।
तब वेद-व्यास जी ने 10वें दिन उन्हें नदी में स्नान करवाया। यही वजह है क‍ि 10 द‍िनों तक गणेश – उत्‍सव मनाया जाता है।

 

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