गजल ; माध्यम

 

तुम छोड़ दिए पास गुजरना भी आजकल
ख्वाबों में हर एक रात न आओ तो मैं जानूँ।

यूँ भूल गए जैसे कभी भी मिले न हम
यादों से निकल करके बताओ तो मैं जानूँ।

सुनना मुहाल हो गया अब गीत तुम्हारा
कोयल की कूक में न बुलाओ तो मैं जानूँ

पहले तो रूठकरके सताती रही मुझे
बन दर्द – जिगर अब न सताओ तो मैं जानूँ।

मुदद्त हुई तुम्हारी तब्बसुम के दीद को
फूलों में मुस्कराके न छाओ तो मैं जानूँ।

सूखे हैं अश्क अब तो पी जाता हूँ गमे – इश्क
बनकर घटा मगर न रुलाओ तो मैं जानूँ।

आती न गेसूओं की महक अब तमाम रात
खुद को न हवा बनके उड़ाओ तो मैं जानूँ।

गहराइयों में दिल की बस गई हो इस कदर
हिम्मत हो पार कर इसे जाओ तो मैं जानूँ।

उपरोक्त गजल स्वर्गीय बी एन झा द्वारा लिखित पुस्तक इन्द्रधनुष से ली गई है ।

 

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