प्रीति – सक्सेना की कहानी में क्या है खास ?

 

पूजा पपनेजा।

दिल्ली एक ऐसी जगह है जहां लोग दूर – दूर से घूमने आते है, वही अगर आपसे हम कहानियों के बारे में चर्चा करे तो रोजमर्रा की तरह यहाँ पर बहुत – सी ऐसी कहानियाँ है. जो किसी भी व्यक्ति के जीवन को बदल सकती है , अब हम आपसे जिस कहानी के बारे में चर्चा करने वाले है, वह कहानी बेहद ही खास है।

  • प्रीति सक्सेना की कहानी में क्या है खास ?

यह कहानी, दिल्ली के उत्तम नगर में रहने वाली प्रीति सक्सेना की है. उनकी आयु 31 वर्ष है। इस कहानी में आपको यह बता दें कि प्रीति बचपन से ही बहुत मेहनती थी , जब वह मात्र 11 वर्ष की थी तभी प्रीति के पिता ने उन्हें सिलाई का काम सिखाना शुरू कर दिया था।

क्योंकि प्रीति के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी इसलिए प्रीति ने बहुत छोटी सी उम्र में ही अपने पिता के साथ काम पर जाना शुरू कर दिया था। उसके बाद प्रीति घर में आकर अपनी पढ़ाई भी पूरी करती थी।

वही प्रीति जैसे – जैसे बड़ी होती चली गई तो उसकी ज़िम्मेदारियाँ भी बढ़ती चली गई , फिर प्रीति ने सिलाई को ही अपना प्रोफेशन बनाना शुरू कर दिया उसके बाद प्रीति ने 2020 में शादी कर ली , फिर शादी के बाद प्रीति ने सिलाई का काम छोड़ दिया ।

लेकिन , जैसे – जैसे समय आगे बढ़ा तो प्रीति के पति आशिष सक्सेना के मन में यह विचार आने लगा कि प्रीति को अपने अंदर की कला को यूँ खत्म नहीं करना चाहिए, जिसके बाद प्रीति के पति आशिष ने प्रीति से कहा कि प्रीति तुम्हें अपने काम को दुबारा शुरू करना चाहिए फिर उसके बाद प्रीति के मन में भी विचार आने लगा कि हां मुझे अपना कुछ नया काम शुरू करना चाहिए।

उसके बाद प्रीति ने घर में बैठकर यूँही घर में नए कपड़े को लाकर उसे बेग बनाना शुरू किया, उसने धीरे – धीरे इसे अपना काम बना लिया आज प्रीति घर में बैठकर बैग्स की सिलाई का काम कर रही है।

प्रीति के पति आशिष सक्सेना भी उनका इस काम में साथ देते है , इसलिए कहा जाता है अगर जीवन में अच्छा जीवनसाथी मिले तो हमें उसकी कद्र करनी चाहिए।

इस कहानी में सबसे खास बात यह है कि प्रीति ने अपने जीवन के इस सघर्ष में कभी हार नहीं मानी अपनी कला को भी जिंदा रखा इसलिए प्रीति की कहानी हमें बहुत कुछ नया सिखाती है , इसके अलावा अब प्रीति अशप्रीत कलेक्शन के नाम से मशहूर हो चुकी है वही पर वह अपने बैग्स भी सेल करती है।

इसलिए इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि सभी व्यक्तियों को अपना काम दिल लगाकर करना चाहिए जैसे प्रीति ने किया ।