आज ही क्यों दुनिया वाले दुनियादारी निभा रहे है ,


जब जिंदा था , तब किसी ने अपने पास बिठाया ही नही।
आज खुद ही मेरे पास बैठे जा रहे है,

जब जिंदा था , तब किसी ने बात तक नही की।
आज सब मेरी ही  बातें किये जा रहे है ।

जब जिंदा था तब किसी ने मेरे बारे में पूछा ही नहीं।
आज रोकर सभी मेरा शोक मना रहे है ,

कल तक किसी ने एक रूमाल तक नहीं दिया।
आज कफन मुझपे क्यों ड़ाल रहे है ?

कल तक किसी ने एक वक्त का खाना तक नही पूछा ?
आज मेरी लाश पर देसी घी क्यों बहा रहे है ?

आज मेरे घर पर भीड़ क्यों लगा रहे है ?
जब जिंदा था तो कोई हमदर्द नहीं था,

आज मेरे मरने पर क्यों आंसू बहा रहे है।
आज ही क्यों दुनिया वाले दुनियादारी निभा रहे है ,

उपयुक्त पक्तियां सुधीर सोनी के द्वारा लिखी गई है।