मीमांसा डेस्क।
ये हैं त्याग की गाथा , दर्द की कहानी ,
आज भी सुनाती है हर इक निशानी।
कैसे सलीब पे यूं लटके प्रेम के दाता ,
धरा पे मानवता के वो सच्चे विधाता।
सर पे कांटो का ताज़, नैनों में करुणा ,
हर पीड़ा में उनकी दिखती साधना।
प्रभु ने अपनों के लिए सब कुछ सहा ,
इतनी नफरत में भी प्यार से ही कहा।
मित्रों गुड फ्राइडे हमें यहीं है सिखाता ,
क्षमा करने से ही जीवन महक जाता।
त्याग , दया व प्रेम का ईशु देते संदेश ,
यही है ईश्वर का सीधा – सच्चा परिवेश।
चलो आज हम भी मिलकर प्रण करें ,
नफरत की आग़ छोड़ प्रेम धारण करें।
हर दिल में उजालों का दीपक जलाए ,
स्नेह – प्रेम से मानवता फिर से मुस्कुराए।