सर्वपितृ अमावस्या का क्या है महत्व? जानिए श्राद्ध, तर्पण और दान करने की परंपरा

 

पूजा पपनेजा।

हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन पूर्वज पृथ्वी लोक से विदा होते हैं। इस दिन पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। इतना ही नहीं अगर आप अपने पूर्वजों की तिथि या उनका श्राद्ध करना भूल गए हैं, तो अमावस्या तिथि श्राद्ध कर्म के लिए सबसे विशेष मानी जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की अमावस्या तिथि को सर्वपितृ अमावस्या के नाम से जानते हैं। कहा जाता है कि इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • सर्वपितृ अमावस्या क्या है ?
    यह आश्विन मास की अमावस्या होती है, जिसे महालय अमावस्या, पितृ विसर्जनी अमावस्या और पितृमोक्ष अमावस्या भी कहा जाता है।
  •     सर्वपितृ अमावस्या का शुभ मुहूर्त क्या है ?
    हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 09 अक्टूबर को रात 09:35 बजे से प्रारंभ होकर 10 अक्टूबर को रात 09:19 बजे तक रहेगी। उदयातिथि में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। 
  • सर्वपितृ अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए।
  • सर्वपितृ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। अगर नदी में स्नान करना संभव नहीं है तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। हाथ में जल, कुशा और तिल लेकर पितरों का स्मरण करते हुए संकल्प लें।

 अगर पितरों की तिथि ज्ञात नहीं है तो इस दिन सभी पितरों के नाम का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किया जा सकता है। दोपहर (कुतुप काल) में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुशा, काले तिल और जल से तर्पण करें।
सर्वपितृ अमावस्या पर भोजन तैयार होने के बाद सबसे पहले देव, गाय, कुत्ते, कौआ और चींटियों के लिए भोजन का कुछ हिस्सा निकाला चाहिए।

इस दिन सात्विक भोजन बनाकर ब्राह्मणों को खिलाना चाहिए और अपनी क्षमता केअनुसार अन्न, वस्त्र, तिल और धन का दान करना चाहिए।
शाम के समय घर की दक्षिण दिशा में पितरों के नाम से तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इससे भी आपके पितृ प्रसन्न होते है।

  •    सर्वपितृ अमावस्या के दिन क्या नहीं करना चाहिए।

सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए और घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए कुछ कार्यों को नहीं करना चाहिए।

  •  तामसिक भोजन का सेवन:

इस दिन तामसिक भोजन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। मास-मदिरा का सेवन करने से बचना चाहिए।

  •    घर में कलह या विवाद न करें:
    इस दिन घर में कलह या विवाद नहीं करना चाहिए। किसी का भी अपमान न करें। इस दिन क्रोध या गुस्सा नहीं करना चाहिए।
  •    खाली हाथ नहीं लौटाएं:
    इस दिन घर के द्वार पर आए किसी भी गरीब, जरूरतमंद, गाय, कुत्ते या कौआ का अनादर नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें भूखा जाने देना चाहिए।
  • नया सामान नहीं खरीदें:
    इस दिन नए कपड़ें, सोना-चांदी, गाड़ी या संपत्ति की खरीदारी से बचना चाहिए।

नोट – यह आर्टिकल केवल जागरूकता के लिये है। इस आर्टिकल का उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत पहुँचाना नहीं है।