गोवा का इतिहास

 

मीमांसा डेस्क।

गोवा के लंबे इतिहास की शुरुवात तीसरी सदी इसा पूर्व से शुरू होती है जब यहाँ मौर्य वंश के शासन की स्थापना हुई थी। बाद में पहली सदी के शुरुवात में इस पर कोल्हापुर के सातवाहन वंश के शासकों का अधिकार स्थापित हुआ और फिर बादामी के चालुक्य शासकों ने इस पर वर्ष 580 से 750 तक राज किया। इसके बाद के सालों में इस पर कई अलग – अलग शासकों ने अधिकार किया। वर्ष 1312 में गोवा पहली बार दिल्ली सल्न्नत के अधीन हुआ लेकिन उन्हें विजयनगर के शासक हरिहर प्रथम द्वारा वहाँ से खदेड़ दिया गया। अगले सौ सालों तक विजयनगर के शासकों ने यहाँ शासन किया और 1469 में गुलबर्ग के बहामी सुल्तान द्वारा फिर से दिल्ली सल्न्नत का हिस्सा बनाया गया।
बहामी शासकों के पतन के बाद बीजापुर के आदिल शाह का यहाँ कब्जा हुआ जिसने गोआ – वेल्हा को अपनी दूसरी राजधानी बनाया।
1510 में , पुर्तगालियों ने एक स्थानीय सहयोगी ,तिमैया की मदद से सत्तारूढ़ बीजापुर सुल्तान युसूफ आदिल शाह को पराजित किया। उन्होंने वेल्हा गोवा में एक स्थायी राज्य की स्थापना की। यह गोवा में पुर्तगाली शासन का प्रांरभ था जो अगली साढ़े चार सदियों तक चला।
1843 में पुर्तगाली राजधानी को वेल्हा गोवा से पंजिम ले गए। मध्य 18 वी शताब्दी तक , पुर्तगाली गोवा का वर्तमान राज्य सीमा के अधिकांश भाग तक विस्तार किया गया था।
भारत ने 1947 में अंग्रेजों से स्वतंत्रता प्राप्त की , भारत सरकार ने अनुरोध किया कि भारतीय उपमहाद्वीप में पुर्तगाली प्रदेशों को भारत को सौंप दिया जाए , किंतु पुर्तगाल ने अपने भारतीय परिक्षेत्रों की संप्रभुता पर बातचीत करना अस्वीकार कर दिया। अंतत; 19 दिसंबर 1961 को , भारतीय सेना ने गोवा , दमन , दीव के भारतीय संघ में विलय के लिए ऑपरेशन विजय के साथ सैन्य संचालन किया और इसके परिणामस्वरूप गोवा , दमन और दीव भारत का एक केंद्र प्रशासित क्षेत्र बना। 30 मई 1987 में केंद्र शासित प्रदेश को विभाजित किया गया था , और गोवा भारत का पच्चीसवां राज्य बनाया गया। जबकि दमन और दीव केंद्र शासित प्रदेश ही बने रहे जो आज तक कायम है।

  •    यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव
  • गोवा करीब – करीब 500 साल तक पुर्तगाली शासन के आधीन रहा , इस कारण यहाँ यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव बहुत महसूस होता है। गोवा की लगभग 60 प्रतिशत जनसंख्या हिंदू और लगभग 28 प्रतिशत जनसंख्या ईसाई है। गोवा की एक खास बात यह है कि , यहाँ के ईसाई समाज में भी हिंदुओं जैसी जाति व्यवस्था पाई जाती है।

गोवा के दक्षिण भाग में ईसाई समाज का ज्यादा प्रभाव है लेकिन वहाँ के वास्तुशास्त्र में हिंदू प्रभाव दिखाई देता है। सबसे प्राचीन मन्दिर गोवा में दिखाई देते है। उत्तर गोवा में ईसाई कम संख्या में हैं इसलिए वहाँ पुर्तगाली वास्तुकला के नमूने ज्यादा दिखाई देते है।
हालांकि पुर्तगाली लोगों ने यहाँ के संस्कृति का नामोनिशान मिटाने के लिए बहुत प्रयास किए लेकिन यहाँ की मूल संस्कृति इतनी मजबूत थी कि धर्मातरण के बाद भी वो मिट नहीं पाई।
एक गंतव्य स्थान के तौर पर गोवा अन्य जगहों से भलीभांति जुड़ा है , और यहाँ हर उम्र के लोग छुट्टियाँ बिताने के लिए आसानी से पहुँच सकते हैं।
नाइट – लाइफ , बीच और पार्टियों के अलावा यहाँ भारत के दूसरे शहरों की अपेक्षा अधिक शांति है जो देशी यात्रियों के लिए एक अच्छा परिवर्तन हो सकता है। छुट्टियाँ बिताने आए विदेशी यात्री यहाँ के खुलेपन , हवा और घुमावदार गलियों का मजा ले सकते है।
       

  •    यातायात

डैबोलिम विमानक्षेत्र यहाँ का घरेलू हवाई अड्डा है जो देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है। अभी हाल के वर्षो में गोवा के लिये पणजी हवाई अड्डे से अंतर्राष्टीय उड़ाने भी शुरू हुई हैं। सड़क मार्ग से गोवा मुम्बई , बंगलोर से काफी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है , इन शहरों से गोवा के लिये सीधी लक्जरी बसें चलती हैं। इसके अलावा अन्य नजदीक के शहर भी आप सड़क द्वारा यहाँ से जा सकते हैं। इसके अलावा रेल मार्ग से भी गोआ पहुंचा जा सकता है। जबसे यहाँ कोंकण रेलवे की शुरुवात हुई है गोवा भारत के पूर्वी तटीय शहरों से जुड़ गया है। कोंकण रेलवे अपनी गति और अच्छी सेवा के लिये पूरे भारत में मशहूर है। इसके अलावा गोवा आने के लिये देश के किसी भी बड़े स्टेशन से आप वास्को द गामा के लिये सीधी
रेलगाड़ी पकड़ सकते हैं। गोवा पहुँचने पर बिना मीटर और मीटर वाली टैक्सियाँ यहाँ पर्यटकों को एक स्थान से दूसरे स्थान लें जाने का सबसे लोकप्रिय साधन है। बिना मीटर वाली टैक्सियों में यात्री पहले से भाड़े के बारे में तय करते हैं। इसके अलावा बस से भी के अंदर एक से दूसरे जगह जाया जा सकता है। गोवा में ज्यादातर बसे प्राईवेट चालकों द्वारा चलाई जाती हैं। आमतौर पर बसों में काफी भीड़ होती है। गोवा सरकार द्वारा यहाँ कदम्ब बस सर्विस चलाई जाती है जिनमें धीरे चलनेवाली बसों से लेकर द्रुत सेवा की लंबी दूरी की बसें शामिल होती हैं। समुद्र में नाव के द्वारा भी एक से दूसरे बीच तक जाने का प्रबंध सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर है।

विभिन्न सकलनों पर आधारित।