एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस। कुछ वक्त पहले तक एआई की बात होते ही हमारी निगाहों के सामने कुछ ऐसे रोबोट्स की तस्वीरें आ जाती हैं ,जो मनुष्यों की तरह बोलते – बतलाते और काम करते हैं। इसका कारण भी था , क्योंकि फिल्मों ने हमारी निगाह में एआई को कुछ ऐसा ही पेश किया था। उस दौर तक एआई से हमारा डर कुछ ऐसा होता था कि अगर मशीनें अपना दिमाग लगाकर मनुष्यों से विद्रोह कर देंगी , तो क्या होगा।
लेकिन यह डर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से बिलकुल भी जुड़ा नहीं होता था। फिर कुछ साल पहले दौर शुरू हुआ चैट जीपीटी , ग्रोक , मेटा और परप्लेक्सिटी जैसे चैटबोट्स का। इनके आते ही एआई की चर्चा और इनसे डरने का तरीका बदल गया।
अब इनसे जुड़ा डर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में घर करने लगा है। ऐसे में जरूरी है कि हम यह समझें कि असल में एआई है क्या और इससे हमें क्या नफा – नुकसान हो सकता है। आज हम इसी विषय पर बात करने वाले हैं।
सबसे पहले आते हैं इस सवाल पर कि एआई है क्या ? शाब्दिक तौर पर देखें तो एआई का मतलब है मशीनों को मनुष्यों की तरह सोचने और समझने की क्षमता देना। लेकिन यह इतना सीधा मामला नहीं है। एआई किसी एक मशीन को मनुष्य बना देने जैसा नहीं है , बल्कि यह अलग – अलग सॉफ्टवेयर के जरिये अलग – अलग मशीनों को कुछ चुनिंदा क्षमता देने जैसा है।
असल में एआई बहुत नई चीज नहीं है। हम सब अनगिनत तरीके से एआई का इस्तेमाल करते हैं। गूगल पर कुछ सर्च करना , यूट्यूब द्वारा आपको वीडियो सजेस्ट किया जाना , इमेल का ऑटो रिप्लाई या फोन के कैमरे से आपकी फोटो का खुद इम्प्रूव हो जाना। इस सबके पीछे
एआई ही तो है।
तब सवाल आता है कि एआई काम कैसे करता है ?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने छोटे बच्चे को एक तस्वीर दिखाई और उसे कहा कि यह बिल्ली है। अगली बार उस तरह की तस्वीर देखते ही बच्चा खुद समझ जाता है कि यह बिल्ली है।
एआई भी यही काम करता है। उसे बहुत सारा डाटा दिया जाता है और वह उसी से सीखता है। इसी को कहा जाता है मशीन लर्निंग। हम जब यूट्यूब पर कोई वीडियो देखते हैं , तो उसके पीछे का एआई उस वीडियो के प्रकार के हिसाब से हमारी पसंद को समझने की कोशिश करता है और अगली बार हमें उसी से मिलता – जुलता वीडियो सजेस्ट करता है। धीरे – धीरे वह आपकी पसंद और नापसंद को अच्छे से समझने लगता है। इससे हमारे लिए कई काम आसान हो जाते है।https://vikalpmimansa.com/ai-se-dosti-fayde/
- तब फिर सवाल ये आता है कि आखिर लोग एआई से डरते क्यों है ?
क्योंकि उन्हें लगता है कि मशीन इंसानो की जगह ले लेगी उन्हें लगता है कि इसका इस्तेमाल करना बहुत मुश्किल है।
और कुछ लोगों को लगता है कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है लेकिन , एक बात समझिए , कि हर नई चीज शुरू में डराती ही है। जब पहली बार मोबाइल आया था , तब भी लोग घबराए थे। - लेकिन वही मोबाइल आज हमारी जिंदगी का हिस्सा है। आज इसी मोबाइल और इंटरनेट ने हमारे जीवन को कितना आसान बना दिया है।
- ऐसा ही एआई के साथ है। हमें यह समझना होगा कि एआई सिर्फ एक टूल यानी साधन है। इस बात में संदेह नहीं कि इसका गलत इस्तेमाल संभव है। लेकिन वही बात , गलत इस्तेमाल तो चाक़ू का भी हो सकता है। असल में खतरा एआई से नहीं , सिर्फ उसके प्रयोग करने के तरीके से है। हमें उसका सही इस्तेमाल करना सीखना होगा।
- इसी के लिए जरूरी है एआई से दोस्ती।
- एआई से दोस्ती करना जरूरी है , क्योंकि ये हमारा समय बचाता है।
- काम आसान बनाता है।
- हमें नई चीज़ें सिखा सकता है।
- और हमें आगे बढ़ने में मदद कर सकता है बस जरूरत है सही तरह से एआई का इस्तेमाल करने की।
- जैसे हर चीज़ के दो पहलू होते हैं , वैसे ही इनके भी हैं।
- अगर हम इसका सही इस्तेमाल करें तो ये हमें आगे ले जाएगा।
- लेकिन अगर गलत तरीके से इस्तेमाल करें तो नुकसान भी हो सकता है इसलिए जानकारी लें।
- सोच – समझकर इस्तेमाल करें।
- और दूसरों को भी सही जानकारी दें।
उपर्युक्त सुझाव तकनीक विशेषज्ञ व वरिष्ठ पत्रकार अमित तिवारी द्वारा दिये गये है।