पूजा पपनेजा।
दुनिया में ऐसी कई कहानियां हैं, जिनसे हर व्यक्ति को जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर कुछ न कुछ जरूर सीखने को मिलता है। ऐसी ही एक कहानी करण वर्मा की भी है।
करण वर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। वह अपने परिवार के सबसे बड़े पुत्र हैं और उनके दो भाई-बहन भी हैं। उनकी उम्र 22 वर्ष है। वह बचपन से ही बहुत मेहनती है। वही अपने परिवार में सबसे बड़े होने के कारण बचपन से ही उनके कंधों पर कई जिम्मेदारियाँ भी थीं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। इन्ही जिम्मेदारियों को निभाने के लिये उन्होंने कही जगहों पर नौकरियाँ करनी भी शुरू कर दी थी। जिसके कारण वह अपनी शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाये थे । इसी वजह से उन्होंने ने अपने सपनों को भी पीछे छोड़ दिया था।
लेकिन उन्होंने अपनी ज़िंदगी में जो भी चीज हासिल करने की कोशिश की, उसके पीछे उनकी मेहनत और संघर्ष काफी रहा है।उन्होंने अपने जीवन में अपनी खुशियों को न देखकर हमेशा अपने परिवार की खुशियों को आगे रखा है। इन्ही जिम्मेदारियों को निभाने के लिये करण अपने मामा – मामी के पास दिल्ली जाने का भी फैसला करते है। वह उनके साथ दिल्ली में रहने लगते है। वही नौकरी भी करते है।
जब वह दिल्ली में नौकरी करने लगते है तब यह सफर उनके लिये आसान नहीं होता उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वही जैसे जैसे समय आगे बढ़ता है, उसके बाद करण की माँ की तबियत अचानक से खराब होने लगती है। उनकी माँ के इलाज की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ जाती है। इसके लिये वह दिल्ली में दो जगह नौकरी भी करने लगते है। वह नौकरी पर जाने के लिये भूखे पेट व पैदल यात्रा करते है। क्योंकि उस समय उनके मन में यह विचार होता है कि मैं पैदल यात्रा के द्वारा कुछ पैसे बचा लूँगा। उससे अपनी माँ का इलाज करा लूँगा।
उसके बाद करण अपनी माँ का इलाज कराने के लिये पैसे तो इकठ्ठा कर लेते है लेकिन वह अपनी माँ को नहीं बचा पाते।
वही माँ को खोने का दर्द उनके जीवन से अभी कम भी नहीं हुआ था कि उसके बाद उनकी बहन की शादी की जिम्मेदारी भी उनके कंधो पर आ जाती है। वह अपनी बहन की शादी करने के लिये व खुद के गम को भूलकर दिल्ली में चार जगहों पर काम करना शुरू कर देते है। उसके बाद वह उन पैसो को इकठ्ठा करके अपनी बहन की शादी बहुत धूमधाम से करते है। ऐसा करके उनकी बहन की शादी भी हो जाती है।
फिलहाल करण अब दिल्ली में अभी एक अच्छी जगह पर नौकरी कर रहे है वही उनका यह भी मानना है कि आज के समय में हर व्यक्ति अपने जीवन में कही न कही संघर्ष कर रहा है। इसलिये किसी भी व्यक्ति को अपने जीवन में संघर्ष करने से नहीं डरना चाहिये।
इस कहानी का सार यही है कि आज के समय में हर इंसान को अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिये और अपने रिश्तों की कद्र करनी चाहिए।यही आज की युवा पीढ़ी को भी सीखना चाहिये।