मिसीज बतरा को शहर में आये कुछ ही माह हुये थे। बतरा साहब सरकारी अस्तबल के एक बड़े ओहदेदार थे। चुँकि अस्तबल में आये कुछ ही दिन हुये थे। इसलिये नाल नहीं ठोका गया था। दुआ सलाम वाले दूर से ही दीदार पाकर चले जाते थे। उनकी गृहस्थी की गाड़ी बहुत मुश्किल से चल रही थी। मिसीज बतरा बड़े घर की बेटी थी। कभी चुल्हे चौके के साथ रोमांस किया नहीं था , इसलिये परेशानी बढ़ी हुयी थी। अपनी परेशानी मियां पर ठेलते हुए साफ – साफ कह दिया कि गैस चूल्हे का इन्तजाम नहीं हुआ तो खाने का इन्तजाम होटल में हीं करना पड़ेगा।
बतरा साहब रोज गैस एजेंसी वाले को टेलीफोन करते और वह नम्बर आने पर देने की बात करता। बेचारे नियम कानून के पालक मन मार कर रह जाते। घर में रोज डांट सुनते। बड़े अफसर बने फिरते हैं। एक गैस चुल्हे का इन्तजाम नहीं कर सकते। बेचारे करते भी क्या ? गैस वाला मिनिटरी का रिटायर्ड कर्नल था। काफी रसूख वाला भी था साथ ही साथ मुँहफट भी। इसलिये लोग उससे डरते भी थे।
बतरा साहब के निकम्मेपन पर लानत देती हुयी मिसीज बतरा ने मिसीज सिंह से कहा। मिसीज सिंह ने मिस्टर सिंह से कहा। और एक दिन अहले सुबह मि. सिंह बतरा साहब के पास टहलते हुए आये। बात – चीत के दौरान गैस चूल्हे की बात निकल गयी। मि. सिंह ने कहा कि कोतवाली के ऑफिसर इनचार्ज से क्यों नहीं कहते।
आपकी सारी समस्या चुटकी बजाते ठीक कर देगा। इच्छा न होते हुये भी मैडम के डर से टेलीफोन पर थाना प्रभारी को बंगले पर बुलवाया और अपनी परेशानी बतायी। दारोगा ने सलामी ठोकी और कहा कि हुज़ूर वह कर्नल था तो मैं दारोगा हूँ।
थाना में जाते हीं दारोगा ने गैसवाले को टेलीफोन किया कि बिना लाइन का चार गैस कनेक्शन चाहिये। कर्नल ने अपनी तौहिनी समझी। बड़े – बड़े को डाँटते देर नहीं लगती और यह नामाकूल दारोगा की यह हिम्मत की मुझ पर रोब गालिब करे। उन्होंने टेलीफोन पर दारोगा को बहुत डाँटा। उस समय दारोगाजी चुप रहे।
चौथे दिन एस.पी. और कर्नल का टेलीफोन आया। आपके इलाके में सिलेंडरों की बहुत चोरी हो रही है। दारोगा ने मासू मियत से जवाब दिया हुज़ूर पता कर रहा हूँ।
कम्पनी के नियमानुसार सिलिंडर की चोरी होने पर अगर दारोगा केस को सही कर देता है तो कम्पनी को दूसरा सिलिंडर देना होता है।
सातवे दिन कर्नल का आदमी दारोगा जी के पास पहुँचा। दारोगा जी। कितना कनेकसन बिना लाइन का चाहिये। दारोगा जी पहले तो उछले – कूदे फिर शान्त हो गये। आठवें दिन बतरा साहब ने यहाँ चार सिलिंडर का कनेक्शन हो गया।
दारोगा जी के दुश्मनों का कहना है कि दस कनेक्शन दारोगा जी के रिश्तेदारों के यहाँ लग गये। लेकिन उसी दिन से सिलिंडर की चोरी भी बंद हो गयी।
उपर्युक्त यह कहानी परत – दर – परत पुस्तक लेखक सिद्वेश्वर नाथ पांडेय के द्वारा लिखी गई है। यह विकल्प – मीमांसा के संपादकीय सलाहकार भी रहे है। अब वह दिवंगत है।