बारिश की मार से तितारपुर के रावण कारीगर परेशान, द्वारका में बनेगा 221 फीट ऊंचा रावण

पूजा पपनेजा।

दशहरे पर रावण दहन की तैयारियां शुरू होते ही दिल्ली के बाजारों और अलग-अलग इलाकों में रौनक बढ़ने लगती है। लेकिन इस बार तेज बारिश ने रावण के विशाल पुतले बनाने वाले कारीगरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बारिश के कारण कारीगरों के कुछ रावण तो भीग गये है कुछ बच भी गये है तो इस वजह से उन्हें उस पर विशेष मेहनत करनी पड़ रही है। जिस वजह से उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।

इसके साथ आपको यह भी बता दें कि कारीगरों को हर साल दशहरे से काफी उम्मीदें रहती हैं। महीनों की मेहनत के बाद तैयार होने वाले पुतलों की बिक्री से उन्हेंअच्छी कमाई होने की आशा भी रहती है। इसी कमाई से वे अपने परिवार का खर्चा भी चलाते हैं। ऐसे में त्योहार से ठीक पहले बारिश होने के कारण पुतलों को नुकसान पहुंचना उनके लिए अभी एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
इसमें आपको यह भी बता दे कि दिल्ली का तितारपुर रावण के पुतले बनाने वाले कारीगरों के लिए बेहद प्रसिद्ध है।इस क्षेत्र को टैगोर गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। वही पर रावण बनाने का कार्य भी किया जाता है। इसकी तैयारी के लिये कारीगर 4 महीने पहले ही अपने काम पर लग जाते है।

जब हमने यहाँ पर रावण बनाने वाले एक कारीगर महेंद्र से बात की तो उसने बताया कि उसने 25 रावण बनाये थे। लेकिन उसके 10 रावण बारिश में भीगने की वजह से फट गये है। जिस वजह से उसका बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है जो रावण बच गये है उन्हें अतिरिक्त सामग्री का इस्तेमाल करके उसे ठीक करना पड़ रहा है। वही ऑर्डर आने वाले रावणों को समय पर दूसरी जगह भेजना भी अभी उनके लिये एक बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि एक रावण को बनाने में 8 से 10 दिन लग जाते है इसे बांस, कागज और अन्य सामग्री मिलाकर तैयार किया जाता है। दूसरे लोगों के द्वारा ऑर्डर भी दिये जाते है। इसे दूसरे स्थानों पर समय पर भेजना भी जरूरी होता है। लेकिन इस बार की बारिश की वजह से उन्हें अधिक मेहनत करनी पड़ रही है। वही उनका यह भी कहना है कि पिछले साल में भी इस साल में भी उन्हें कुछ खास फायदा नहीं हुआ है।

इस बार के सबसे बड़े रावण के बारे में आपसे चर्चा करे तो द्वारका सेक्टर – 10 में सबसे बड़ा रावण जलाया जायेगा। इसके साथ ही आपको यह भी बता दें कि इसकी लंबाई 221 फ़ीट रखी गयी है। कई महीनो से इसे तैयार करने का काम भी किया जा रहा है । बड़ी संख्या में सभी मजदूर इसे मिलकर बना रहे हैं। यह रावण पूरी तरह से इको फ्रेंडली है।इसके अलावा आपको यह भी बता दें कि द्वारका सेक्टर – 10 में बारिश भी इस बार रावण का कुछ बिगाड़ नहीं पाएगी। क्योंकि इसमें कागज और गोंद का इस्तेमाल नहीं किया गया है।यानी दिल्ली वाले इस बार बेहद अनोखा दशहरा देखने जा रहे हैं। वहीं कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी 90-90 फीट ऊंचे बनाए जा रहे हैं।