अखबारी नेता

  लोकल गाड़ियों में अमूमन ऐसी भीड़ होती है कि गाड़ी में बैठने की बात कौन…

राजनीति की पढ़ाई

  एक राजा था। उसके चार बेटे थे। चारों पढ़ने में कम गुनने में ज्यादा समय…

व्यापारी

  राजा विक्रमादित्य जैसे ही वैताल को कंधे पर लादकर चला , वैताल बोल उठा –…

फिल्म और फिल्मकार

  आशुतोष बाबू फिल्म देखते हैं। पहले देखता था , अब नहीं। तब तो राजकपूर की…

रक्षक का भय

  आशुतोष बाबू पर अक्सर दौरा पड़ता है। जहाँ कुछ देखा नहीं कि नकल में लग…

कविता ; बेटियों की दूरी का दर्द…!

  चार दीवारों के भीतर, जब रिश्तों पर ताले लगते हैं, तब सबसे पहले बचपन की…

समस्या का निदान

  रेलगाड़ी में बैठा अखबार पढ़ रहा था। बगल में चार – पाँच लोग जो सम्भवत;…

सर दर्द की दवा

  मरीज दर्द से छटपटा रहा है। डॉक्टर सुई पर सूई दिये जा रहा है लेकिन…

कविता ; आज तीन दिन के बाद

  यहाँ का हर फूल गूंगा क्यूँ है ? मेरी अंगूठी में उदास मूंगा क्यूँ है…

मां

  मां , शब्द सुनकर आ जाती है सबके चेहरों पर उमंग , खिल उठते हैं…