मंत्रीजी के एक चमचे ने मंत्रीजी को छींकते हुये देख लिया। चमचे का भाव गिरा हुआ था, इसलिये भाव को ऊंचा उठाने के लिये , उसने राजधानी के तमाम अखबारों में , मंत्रीजी की तबियत खराब होने की खबर दे दी। अगले दिन लगभग तमाम अखबारों में बॉक्स में खबर छप गई। मंत्रीजी के मिजाजपूर्सी के लिये भीड़ जुटने लगी। डाक्टर पर डाक्टर बुलाये जाने लगे। मंत्री जी , यश में बढ़ोत्तरी से काफी खुश हुये। चमचे के भाव में अच्छा खासा उछाल हो गया।
मंत्रीजी के विरोधी चमचों के केलेजे पर चमचे के बढ़ते यश को देखकर सांप लोट गया। वे तुरंत कार्रवाई में लग गये और अखबारों के सम्पादक से मंत्री जी के बार – बार बीमार होने पर चिंता व्यक्त करवा दिया।
मंत्री जी के विरोधी ; अखबारों की कतरन लेकर दिल्ली उड़ गये और आलाकमान के चमचों को समझाया जाने लगा कि मंत्री को बार – बार बीमार पड़ने से पार्टी की छवि धूमिल हो रही है और सरकार और पार्टी के कार्यकलाप में बाधा पहुँच रही है।
आलकमान के चमचों में से एक चमचे ने मंत्री जी को टेलीफोन पर इसकी सूचना दे दी। तबसे मंत्री जी बड़े – बड़े डॉक्टरों से फिटनेस की सर्टीफिकेट लेकर आलाकमान के चमचों के पास भेजवा रहे हैं। इस हादसे से मंत्री जी को सचमुच दिल का दौरा पड़ गया। लेकिन मंत्री जी ने चुपके से डॉक्टर को दिखलवाया। किसी को कानो – कान खबर तक नहीं होने दी।
उपर्युक्त यह कहानी परत – दर – परत पुस्तक लेखक सिद्वेश्वर नाथ पांडेय के द्वारा लिखी गई है। यह विकल्प – मीमांसा के संपादकीय सलाहकार भी रहे है। अब वह दिवंगत है।