मुझे दुश्मनों की तलाश नहीं,
क्योंकि मेरा सबसे बड़ा दुश्मन
मेरे सामने नहीं,
मेरे भीतर रहता है।
अगर मैं हारूँगा,
तो अपनी सोच से हारूँगा।
अगर मैं बिखरूँगा,
तो अपने ही फैसलों से बिखरूँगा।
दुनिया की कोई साज़िश,
कोई नफ़रत,
कोई वार मुझे तब तक नहीं गिरा सकता,
जब तक मैं ख़ुद अपने हौसले से समझौता न कर लूँ।
जो लोग मेरी बर्बादी की दुआ करते हैं,
मैं उनसे नफ़रत नहीं करता।
मैं तो उनके लिए भी यही दुआ करता हूँ।
ख़ुदा उनकी हर ख़्वाहिश पूरी करे।
क्योंकि मुझे यक़ीन है,
मेरी तक़दीर किसी की बद्दुआ से नहीं बदलती।
मुझे मिटाने की ताक़त
किसी और के हाथों में नहीं,
सिर्फ़ मेरे अपने हाथों में है।
और जिस दिन मैंने
अपने डर, अपनी कमज़ोरियों और अपनी हार पर जीत हासिल कर ली,
उस दिन दुनिया की कोई भी ताक़त
मुझे झुका नहीं पाएगी।
याद रखना…
जो इंसान ख़ुद से जीत जाता है,
उसे हराने वाला
इस दुनिया में कोई पैदा नहीं हुआ।
उपर्युक्त पक्तियां प्रकाश गुप्ता द्वारा लिखी गई है।