राहुल व प्रिया की अधूरी प्रेम कहानी में क्या है खास ?

 

पूजा पपनेजा।

कहते हैं, प्यार जिंदगी के सबसे खूबसूरत एहसासों में से एक है। प्यार एक ऐसा रिश्ता है, जिसकी कहानी हर इंसान के जीवन में किसी न किसी रूप में जरूर जुड़ी होती है। किसी को उसका प्यार मिल जाता है, तो कोई उम्रभर उस खास एहसास का इंतजार करता रह जाता है।

अगर आज आपसे प्यार की बात की जाए, तो शायद आपके मन में भी किसी खास शख्स, किसी रिश्ते या अपनी जिंदगी से जुड़ी कोई कहानी जरूर याद आ जाए। क्योंकि आज की भागती-दौड़ती जिंदगी में हर व्यक्ति अपने साथ एक कहानी लेकर चल रहा है। कुछ कहानियां चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं, तो कुछ आंखों को नम कर देती हैं।

किसी के लिए प्यार एक खूबसूरत रिश्ता है, किसी के लिए उसकी अधूरी कहानी और किसी के लिए जिंदगीभर की एक मीठी याद। यही वजह है कि जब हम किसी की प्रेम कहानी सुनते हैं, तो कहीं न कहीं उसमें अपने जीवन का कोई हिस्सा भी नजर आने लगता है। हम आपसे आज जिस कहानी के बारे में चर्चा करने वाले है वह राहुल व प्रिया की अधूरी प्रेम कहानी है।

  •  राहुल व प्रिया की अधूरी प्रेम कहानी में क्या है खास ?

यह कहानी राहुल व प्रिया की है। यह दोनों दिल्ली के रहने वाले है। इनकी कहानी की शुरुवात कैसे हुई उसके बारे में हम आपसे चर्चा करते है। प्रिया अपने माता पिता की तीसरी संतान थी। उसके तीन बहन भाई थे। वही राहुल अपने माता पिता का दूसरा पुत्र था।

प्रिया एक दिन यूँ ही अपने घर में बैठी थी तभी उसके मन में एक दिन नौकरी करने का विचार आया। उसने अपनी सहेली प्रियंका के पास कॉल लगाया. उससे नौकरी के विषय में पूछने लगी। तभी उसकी सहेली ने उससे उत्तम नगर में एक नौकरी बतायी। जिसके बाद वह वहाँ इंटरव्यू देने जाती है। उसके बाद वहां उसकी नौकरी लग जाती है। वह काफी खुश हो जाती है। इसके बाद वह घर आकर इसकी सूचना अपनी माँ को देती है , जिससे सुनकर उसकी माँ भी काफी खुश हो जाती है।

फिर उसके अगले दिन वह ऑफिस जाना शुरू करती है , तभी उसकी मुलाकात अचानक एक दिन ऑफिस में राहुल से होती है।उसके बाद राहुल व प्रिया की ऑफिस में सामान्य बाते होने लगती है। धीरे – धीरे उनकी दोस्ती बहुत अच्छी हो जाती है वह दोनों एक दूसरे के करीब आने लगते है। उनकी यह दोस्ती प्यार में तब्दील हो जाती है।

उसके बाद वह दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताने लगते है। फिर वह शादी करने का भी विचार बनाते है ।लेकिन वक्त को कुछ और ही मंजूर होता है वक्त जैसे जैसे आगे बढ़ता है , राहुल अपने काम में ज्यादा ही व्यस्त होने लगता है। उसके मन में पैसा कमाने का ज्यादा लालच आ जाता है वह प्रिया से दूरियाँ बनाने लगता है।

यह सब देखकर प्रिया एक दिन राहुल को कॉल करती और उसे काफी समझाने की कोशिश करती है , लेकिन राहुल प्रिया की बात को नहीं सुनता।

धीरे – धीरे प्रिया  राहुल के इस व्यवहार से टूटने लगती है ,ऐसे में प्रिया के माता पिता उसकी ऐसी हालत देखकर टूट जाते है वह प्रिया को इस परिस्थिति से निकालने के लिये दूसरी जगह विवाह करने का विचार बनाते है।

ऐसे में प्रिया माता पिता की यह बात सुनकर बुरी तरह से टूट जाती है उसके बाद वह इसकी सूचना राहुल को देती है। लेकिन राहुल को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता ऐसे में प्रिया इन सब परिस्थितयों को देखते हुए अपने माता पिता की पसंद के लड़के से शादी कर लेती है।

फिर जैसे जैसे वक्त आगे बढ़ता है तब राहुल को एहसास होने लगता है कि उसने अपने जीवन में बहुत बड़ी गलती कर दी है। वह प्रिया से माफ़ी मांगने के लिये उसे सोशल मीडिया पर ढूढ़ने लगता है लेकिन वह उससे नहीं मिलती। फिर वह अपने दोस्तों को बोलता है लेकिन वहाँ से भी उससे कोई जानकारी नहीं मिलती। फ़िलहाल राहुल आज भी उस लड़की का इतंजार कर रहा है।

इस कहानी का सार हमें यही सीखाता है कि अगर हमें जीवन में कभी सच्चा प्यार मिले तो हमें उसकी कद्र करनी चाहिये। लेकिन आज के समय में हम छोटी – छोटी बातों को बड़ा बना देते है जिस वजह से रिश्ते में प्यार नहीं बन पाता।ऐसे में जरूरी है कि हमें एक दूसरे को समझने की कोशिश करनी चाहिए। यही आज की युवा  पीढ़ी को सीखना चाहिए।