सुरक्षित पर्यावरण में ही जीवन

 

मीमांसा डेस्क।

हर तरफ विकास के इस दौर में औद्योगीकरण , बढ़ती जनसंख्या और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण पर्यावरण अंसतुलित हो रहा है। इससे ग्लोबल वार्मिंग , बाढ़ सूखा और जल सकंट जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। पर्यावरण प्रदूषण केवल प्रकृति को नहीं , बल्कि लोगों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है।

यह एक ऐसा विषय है , जिस पर हर दिन चर्चा के साथ ही काम करने की आवश्यकता है , क्योंकि यह मानव अस्तित्व के साथ जुड़ा है। भले ही आज पर्यावरण सुरक्षा अधिक खतरे में है , मगर इसका अहसास काफी पहले हो चुका था। इसलिये पहला विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 1973 को मनाया गया था। इसके बाद से हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।

इस दिवस का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। जागरूक करने के लिये जगह – जगह कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं , जिनमें जल सरक्षंण, पेड़ बचाने और प्रकृति बचाने से जुड़े अलग – अलग आकर्षक स्लोगन भी तैयार किये जाते हैं। जिससे सभी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका समझें ।

हालांकि पिछले कुछ सालों से वैश्विक स्तर पर कुछ वर्चस्व एवं आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़े कई युद्ध ने भी पर्यावरण को बड़ा नुकसान पहुंचाया है , जिसका आंकलन करने की जरूरत है।

मिसाइलों , खतरनाक हथियारों से निकलने वाला धुंआ मानव के साथ – साथ जीव जंतुओं के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी केवल इंसानों की नहीं , बल्कि सभी जीव – जंतुओं की समान धरोहर है।

आज पर्यावरण को सबसे बड़ा खतरा प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया , तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तभी पृथ्वी पर जीवन संभव होगा। बढ़ता प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के साथ – साथ प्रकृति को भी नुकसान पहुंचा रहा है। हालांकि हर साल 5 जून को विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

स्कूलों में निबंध प्रतियोगिता , चित्रकला प्रतियोगिता और वृक्षारोपण कार्यक्रम किए जाते हैं। सरकार और सामजिक संस्थाएँ भी लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करती हैं।

हमें अपने जीवन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करने चाहिए। जैसे प्लास्टिक का उपयोग कम करना , सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना और पेड़ लगाना। इसके अलावा बिजली और पानी की बचत भी आवश्यक है।

यदि प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी समझे , तो हम पृथ्वी को स्वच्छ और सुरक्षित बना सकते हैं। पर्यावरण की रक्षा करना केवल सरकार का काम नहीं , बल्कि हम सभी का कर्तव्य है।

आज पर्यावरण प्रदूषण विश्व की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन चुका है। मनुष्य अपनी सुविधाओं के लिए प्रकृति का लगातार दोहन कर रहा है।

पेड़ों की कटाई , फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआँ और प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इसके कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है , जिसे ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है।

पर्यावरण प्रदूषण का असर मानव जीवन , पशु – पक्षियों और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ रहा है। जल स्त्रोत दूषित हो रहे हैं और शुद्ध हवा मिलना कठिन होता जा रहा है। यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण के लिए कदम नहीं उठाए गए , तो भविष्य में गंभीर संकट पैदा हो सकते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह संदेश देता है कि हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। हमें अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रयास करने चाहिए। जैसे अधिक से अधिक पेड़ लगाना , प्लास्टिक का उपयोग कम करना और पानी की बचत करना। छोटे – छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं। इसलिये , पर्यावरण की सुरक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है। स्वच्छ पर्यावरण से ही स्वस्थ और सुखी जीवन संभव है।