सुबह – सुबह की खिच – खिच दिन खराब कर देता है। श्रीमतीजी को बारहा आशुतोष बाबू समझाते हैं कि दिन खराब मत किया करो , लेकिन श्रीमतीजी पर इसका कोई ,असर ही नहीं पड़ता।
आज फिर सबेरे – सबेरे श्रीमती जी राय जी से ही उलझी हुई थी। दूध में पानी मिलाकर बेचते हो और पैसा , शुद्ध दूध का लेते हो। राय जी जैसे , ऐसी बातें सुनने के आदी हो, इसलिए धैर्य से हथेली पर खैनी ठोकते रहे। श्रीमतीजी जब गरज बरस कर थक गयीं , तब राय जी ने कहा – मैडम आपके जैसे ग्राहक से हम दूध बेचने से बाज आये।
दरवाजे पर सबेरे – सबेरे आकर दूध दे जाते हैं इसी लिये आप गरम हो रहीं है। दुकान पर जाकर दूध लेकर आती तब पता चलता।
श्रीमती जी कहाँ चूकने वाली। उन्होंने कहा वहाँ भी हंगामा , मचाती। राय जी हँसे और बोले सरसो तेल में रेपसीड /तेल की सरकार की आज्ञा से मिलावट होती है – वनस्पति घी में चर्बी होती है।
चाय में लकड़ी का बुरादा मिला होता है। मतलब खाने पीने की हर चीज में मिलावट रहती है। कभी हल्ला करते आपको नहीं देखा।
राय जी कमजोर हैं इसीलिये गरज रही हैं। व्यापारी मजबूत है इसीलिये आपकी बोलती बंद रहती है।
मैडम यह हिन्दुस्तान है यहाँ कम तौलना और मिलावट करना ही व्यापार होता है। आज से नहीं , सदियों पहले से। हम पर आप इल्जाम लगा रही हैं कि दूध में पानी मिलाता हूँ।
शुक्र कीजिये , मैं पानी हीं मिलाता हूँ – यूरिया नहीं। और मैडम दुनिया में कौन ऐसा बेवकूफ हो जो 10 रुपए लीटर दूध में 12 रु लीटर वाली पानी मिलायेगा।
बोतल वाले पानी से कम से कम चापाकल का पानी भी शुद्ध होता है।
श्रीमती जी चुप।
मैडम सिगरेट पर लिखा होता है , सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है तो सरकार बंद क्यों नहीं कर देती ?
श्रीमती जी राय जी का मुँह देखे जा रही थी , लगता है अब बोलने की उनकी कुबत ही खतम हो गयी हो। श्रीमती जी ताकत संजोकर कुछ बोलना ही चाहती थी कि राय जी फिर हमलावार हो गये।
मैडम सरकारें व्यापारियों के लिये काम करती हैं। रह – रह कर अपनी मौजूदगी दिखाने के लिये तथा जनता में अपनी छवि बनाने के लिये उसके लटके झटके चलते हैं। जॉर्ज फर्नाडेंस का नमक वाला प्रकरण याद होगा।
उनके एक वाक्य ने हर घर में 40 – 50 किलो नमक खरीदवा दिया था। चुनाव नजदीक आ रहा है , उसी की तैयारी है। प्याज , प्लेग , ड्रॉप्सी का हंगामा खड़ा करके सरकार व्यापारियों से रुपये ऐंठे। रुपया मिलते ही सारे रोग हवा हो गये थे।
प्रतिरक्षा की खरीदारी वाला पैसा पर अभी हंगामा जारी है। कफन कांड भी ताजा है।
श्रीमती जी कैच आउट हो चुकी थी। राय जी ने कहा – मैड़म कोकाकोला , पेप्सी वाले अपने पेय में कीट नाशक मिलाते हैं – हल्ला हुआ की मानक से ज्यादा क्यों ? जनसंख्या बढ़ रही है। मानक से ज्यादा कीट नाशक से एकाएक मृत्यु दर बढ़ने से विपक्षी हल्ला कर सकते हैं। इसलिये ठंढ़ा पेय के माध्यम से सरकार धीमा जहर दे रही है। ताकि लोग धीरे – धीरे मरे।
और इस बार सरकार ने लम्बा हाथ मारा। विदेशी कम्पनियों को बिहारी भाषा में अपहरण कर लिया है। एकाध सौ करोड़ से कम में यह मामला पटेगा नहीं।
इधर चंदा हाथ में , उधर जांच रिपोर्ट उनके पक्ष में। माल के साथ नेकनामी भी। बहुराष्टीय कम्पनी भी खुश इससे दस गुणा पैसा तो उसके विज्ञापन पर खर्च होते। सरकार 100 करोड़ में ही विज्ञापन कर दिया।
राय जी दूध की बाल्टी लेकर कब के चले गये। श्रीमती जी दरवाजे पर खड़ी है , हट नहीं रही है , जैसे उनको ठकुआर मार दिया हो।
उपर्युक्त यह कहानी परत – दर – परत पुस्तक लेखक सिद्वेश्वर नाथ पांडेय के द्वारा लिखी गई है। यह विकल्प – मीमांसा के संपादकीय सलाहकार भी रहे है। अब वह दिवंगत है।