चूड़ियाँ केवल काँच नहीं ये मन की मजबूत दीवार ,
हर खनक में छुपी कहानी हर रंग में अनेक विचार।
कहते हैं कायरता की निशानी सच इससे परे कहीं ,
जब – जब भी दुनिया डराती हमें देती हैं हिम्मत यहीं ।
माँ के हाथों की यह चमक संघर्षो का इतिहास कहे ,
रोटी , रिश्ते , सपनों संग , हर दिन एक नई आस गढ़े।
पहली बार जब बेटी पहने , सपनों संग वो डोरी बने ,
नाजुक दिखती कलाई पे अंदर से दुर्गा बन तनी रहे।
न ये बंधन न ये कमजोरी ये हैं पहचान की आवाज़ ,
हर खनक में उठती ज्वाला ये नारी की नई परवाज़।
जब टूटे तो शोर मचाती जैसे अन्याय को ललकार ,
हर टुकड़ा कहता – अब और नहीं , अब सीधा वार।
चूड़ियाँ देवी से हम तक साहस का ही ये सेतु बनीं ,
जो समझे इनकी ताकत , वही ये जीत की धुन बनीं
अगली बार जब ये खनके कमजोरी न समझना तुम ,
यह नारी के साहस की सबसे सच्ची ध्वनि सुनो तुम।
उपर्युक्त पक्तियां लेखक संजय एम तराणेकर द्वारा लिखी गई है।