बैलों का जोड़ा

 

लता प्रियदर्शिनी 

चम्पापुर नाम का छोटा – सा नगर था। यहां अभयवाहन नाम का एक राजा रहता था। उस नगर में लुब्धक नाम का सेठ भी रहता था। उसके पास बहुत सारे गहने और पैसे थे। लेकिन था वह बहुत ही कंजूस। उसने अपने सोने से बहुत सारे पशु – पक्षियों के जोड़े बनवा रखे थे। जिसमें मोर , कबूतर , हिरण , शेर आदि शामिल थे। इन सभी जोड़ों को उसने मोतियों से बहुत ही अच्छी तरह से सजा रखे थे। इन सबमें उसने एक बैल भी बनवाया था , लेकिन  बैलों का जोड़ा नहीं बनवा पाया था , क्योंकि दूसरा बैल बनवाने के लिए उसके पास सोना नहीं बचा था। अत; वह परेशान रहने लगा और रात – दिन बैल का जोड़ा बनवाने के लिए सोचने लगा।
एक बार चम्पापुर नगर में बहुत जोरों की बारिश हो रही थी। पूरे सात दिन तक लगातार बारिश होती रही। लुब्धक के घर के पास नदी में इतना पानी भर गया कि वहां जाने की किसी में हिम्मत नहीं थी। लेकिन लुब्धक को तो सिर्फ अपने बैल के जोड़े बनाने की चिंता थी। वह बिना सोचे ही पानी में जाकर लकड़ी उठाकर उनके गठ्ठे बनाने लगा।
लुब्धक को यह सब करते हुए चम्पापुर की रानी देख रही थी , उसने राजा को बुलाकर ये दिखाया। राजा को लुब्धक पर बड़ी दया आई , उन्होंने सोचा कि यह शायद बहुत गरीब है , जो इतनी बारिश में भी अपनी जान की परवाह करे बगैर लकड़ियाँ इकठ्ठी कर रहा है।
रानी की निगाह
उन्होंने तुरंत अपने सैनिकों से लुब्धक को बुलवाया। राजा ने लुब्धक को अपने खजाने में से जितना चाहे पैसे लेने को कहा। तब लुब्धक ने कहा – महाराज मुझे पैसे नहीं चाहिए। मुझे तो अपने बैल का जोड़ा पूर्ण करना है। लुब्धक राजा को लेकर अपने घर आया। राजा उसके घर में रखे सोने के जोड़ों को देखकर आश्चर्यचकित रह गया। तभी लुब्धक की पत्नी एक थाल में बड़े ही सुंदर रत्न लेकर आई। यह देखकर लुब्धक घबरा गया। उसे लगा कि कहीं मेरी पत्नी यह रत्न राजा को न दे दे। उसने तुरंत ही अपनी पत्नी से वह थाल ले लिया।
तू कितना कंजूस है —
राजा ने देखा कि लुब्धक के हाथ कांप रहे थे। तब राजा ने कहा – लुब्धक तू कितना कंजूस है। तुम किसी को कैसे कुछ दे सकते हो ? तुम्हारे हाथ ही कांप रहे हैं। इतना कह कर राजा वहां से चले गए। लेकिन लुब्धक को इस घटना से कुछ फर्क नहीं पड़ा। उसके दिमाग में तो अभी भी सोना ही घूम रहा था।
लालच बुरी बला
लुब्धक पैसा कमाने के लिए दूसरे देश चला गया। वहां उसने बहुत सारा सोना कमाया। वह अपनी कमाई लेकर अपने देश आ ही रहा था कि समुद्र में बड़ा तूफान आया। इस तूफान में उसका पैसा भी डूब गया। और तो और , वह स्वयं भी डूब कर मर गया।
मरने के बाद अगले जन्म में वह सांप बना और अपने सोने की रक्षा करने लगा। वह सोने के पास किसी को भी नहीं आने देता था। एक दिन लुब्धक के बड़े बेटे ने गुस्से में आकर सांप को मार दिया। उसे यह तो पता नहीं था कि यह सांप पिछले जन्म में उसके पिता थे। लुब्धक ने हमेशा अपने मन में लालच रखा। इसीलिए वह तिर्यच बना। बाद में नर्क चला गया। इसीलिए हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए।