आज लोग साथ रहकर भी एक-दूसरे से दूर क्यों हो रहे हैं ?

 

पूजा पपनेजा।

आज के समय में सोशल मीडिया ने जहां लोगों को एक दूसरे से जोड़ दिया है। वही उनके पारिवारिक जीवन में भी दूरियां पैदा कर दी है।लेकिन क्या वास्तव में हम पहले से ज्यादा एक दूसरे के करीब आए हैं। या फिर एक दूसरे से दूर हो गये है।
उदहारण के तौर पर बात करे तो एक ही घर में साथ रहने वाले लोग भी एक दूसरे के साथ समय न बिताकर सोशल मीडिया पर समय बिताना अधिक पसंद कर रहे है। तो कही न कही हम इन चीजों को देखकर कह सकते है कि लोगों पर सोशल मीडिया का अत्याधिक प्रभाव पड़ा है। शायद इसी वजह से उनके पारिवारिक रिश्ते भी खत्म होते जा रहे है।

अब वही आज की पीढ़ी के बारे में आपसे बात करे तो आज की पीढ़ी पर भी सोशल मीडिया का बहुत प्रभाव पड़ा है वह एक पल भी उसके बिना नहीं रह पा रही है । इस तरह हम देखकर कह सकते है कि हमने सोशल मीडिया को अपने जीवन का एक अहम् हिस्सा बना लिया है जिस वजह से हम अपने पारिवारिक जीवन को भी भूलते जा रहे है।
शायद यही कारण भी है कि आज के बच्चें भी अपने मन की बातें अपने परिवार के साथ न शेयर करके अपने सोशल मीडिया में शेयर करनाअधिक पसंद कर रहे है। उसी वजह से उन्हें अपने पारिवारिक जीवन में लोगों के साथ जुड़ना भी कम पसंद आ रहा है। इसे देखकर हम कह सकते है कि लोगों व बच्चों पर भी अब सोशल मीडिया का अत्याधिक प्रभाव पड़ने लगा है। इसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले समय में रिश्तों में भी बहुत दूरियां आ जायेगी।
लेकिन ऐसा क्यों हो रहा है इससे हम एक छोटी सी कहानी के द्वारा समझने की कोशिश करते है।

  •   निखिल मेहता की कहानी

यह कहानी फरीदाबाद के रहने वाले 26 वर्षीय निखिल मेहता की है। निखिल को सोशल मीडिया पर समय बिताना और ऑनलाइन गेम खेलना काफी पसंद है। खाली समय मिलते ही वह मोबाइल में गेम खेलने लगते है।

ऐसे में उनके माता-पिता अक्सर उन्हें मोबाइल से दूर रहने और अपने भविष्य पर ध्यान देने के लिए समझाते हैं। वे चाहते हैं कि निखिल नौकरी करें, अपने करियर पर ध्यान दें और भविष्य में अपना परिवार बसाएं।

लेकिन निखिल ने अपनी दिनचर्या में मोबाइल और सोशल मीडिया को अपने जीवन में इतना अधिक स्थान दे दिया है कि वह उससे बाहर ही नहीं निकल पाते । इस वजह से वह खुद को भी भूलने लगे है अपने परिवार को समय नहीं दे पाते । जिस वजह से उनके माता पिता भी परेशान होने लगे है।

निखिल की कहानी केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है। यह उन सभी परिवारों की ओर अपना ध्यान केंद्रित करती है कि जो कि एक ही घर में रहने के बावजूद भी अपनी डिजिटल दुनिया में इतना ज्यादा खो चुके है कि वह अपने रिश्तों को भूलते जा रहे है।

लेकिन अब प्रश्न यह उठता है कि ऐसा क्या है कि आज लोग साथ रहकर भी एक-दूसरे से दूर हो रहे हैं?

  •  आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? कि रिश्तों में दूरियां आ रही है ?
  •  मोबाइल ने संवाद करने का तरीका बदल दिया है। सोशल मीडिया ने जहाँ लोगों को इंटरनेट , मोबाइल के द्वारा एक दूसरे से तो जोड़ दिया लेकिन कई न कई रिश्तों में भी दूरियां पैदा कर दी है।
  •  रिश्तों में संवाद कम हो रहा है।पहले के लोग एक दूसरे के साथ बैठकर बात करना पसंद करते थे जिस वजह से रिश्तों में संवाद बना रहता था। लेकिन सोशल मीडिया के बदलते दौर ने पारिवारिक रिश्तों में संवाद को कम कर दिया है।
  •  पारिवारिक रिश्तों में समय की प्राथमिकता ; आज के समय में हर मनुष्य अपने जीवन में अपनी जिम्मेदारियों में इतना ज्यादा व्यस्त हो गया है कि वह अपने पारिवारिक जीवन को समय नहीं दे पा रहा है जिस वजह से आजकल रिश्तों में भी प्राथमिकता कम हो रही है।
  •  हर व्यक्ति अपनी ही दुनिया में व्यस्त है। आज के समय के लोग डिजिटल दुनिया में रहना अधिक पसंद करते है शायद यही कारण है कि डिजिटल दुनिया को ही लोगों ने अपनी दुनिया बना लिया है। वह अपने पारिवारिक रिश्तों को महत्व नहीं दे रहे है।
  •  भावनात्मक जुड़ाव – सोशल मीडिया के अत्याधिक इस्तेमाल ने लोगों को एक दूसरे से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया है जिस वजह से लोगों का पारिवारिक जुड़ाव भी कम हो गया है।
  • ऐसे में क्या करे कि लोग एक दूसरे से न दूर हो।
  •  सोशल मीडिया को कम महत्व देना। अगर आप भी अपने रिश्तों को बेहतर बनाना चाहते है तो सोशल मीडिया पर कम समय व्यतीत करे। अपने रिश्तों को अधिक महत्व दे।
  •  अपने परिवार में अपने मन की बात रखे ; अगर आप अपने पारिवारिक संबंधों को बेहतर बनाना चाहते है तो अपने निजी जीवन को सोशल मीडिया पर न शेयर करे बल्किअपने परिवार में अपने मन की बात रखे इससे भी आपके रिश्ते बेहतर होंगे।
  •  पारिवारिक रिश्तों को अत्यधिक महत्व देना। अगर हो सके तो आप सोशल मीडिया में समय न देकर अपने पारिवारिक रिश्तों को महत्व दें। एक दूसरे से खुलकर बातचीत करे। ताकि रिश्ते बेहतर बने।
  •  परिवारिक रिश्तों को प्रेम करना। अगर आप अपने पारिवारिक रिश्तों को बेहतर बनाये रखना चाहते है तो अपने रिश्तों में प्रेम रखे। तभी आपके रिश्ते बेहतर बन सकते है।
  • आखिर रिश्तों को बचाने की जिम्मेदारी किसकी है ?

आखिर रिश्तों को बचाने की जिम्मेदारी हमारी है लेकिन आज के समय में हम सोशल मीडिया में इतना ज्यादा व्यस्त हो चुके है कि हम खुद को ही भूलते जा रहे है। ऐसे में जरूरी है कि हम सोशल मीडिया का सीमित इस्तेमाल करे। अपने पारिवारिक जीवन को पर्याप्त समय दे। वही अपने पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी समझने की कोशिश करे। यही हम सबको समझने की जरूरत है तभी रिश्ते बेहतर बन सकते है।

नोट – यह आर्टिकल केवल जागरूकता के लिये है इस आर्टिकल का उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत पहुँचाना नहीं है।