भावातीत ध्यान कैसे करें? जानिए विधि…मन की शांति और एकाग्रता बढ़ाने का है शानदार तरीका

 

  • भावातीत ध्यान क्या है?

 

लक्ष्मीनारायण योगाचार्य।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक थकान आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में भावातीत ध्यान एक ऐसी ध्यान पद्धति है, जो मन को गहरे स्तर पर शांत करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती है। इस ध्यान का उद्देश्य विचारों से लड़ना नहीं, बल्कि मन को सहज रूप से गहरी शांति की अवस्था तक पहुंचाना होता है।

हालांकि, ध्यान रखें कि ध्यान मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है, लेकिन यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को गंभीर मानसिक या शारीरिक समस्या है, तो उसे डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

भावातीत ध्यान कैसे करें?

भावातीत ध्यान करने की सामान्य विधि इस प्रकार है—

  •   शांत स्थान चुनें

ऐसी जगह बैठें जहां कुछ समय तक कोई व्यवधान न हो। वातावरण जितना शांत होगा, ध्यान लगाना उतना आसान होगा।

  • आरामदायक मुद्रा में बैठें

कुर्सी, सोफा या जमीन पर आराम से बैठ सकते हैं। रीढ़ को सहज रखें और शरीर को ढीला छोड़ दें।

 

  •  आंखें बंद करें

कुछ क्षण सामान्य रूप से सांस लेते हुए शरीर और मन को शांत होने दें। सांस को नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं होती।

  • किसी मंत्र या शब्द पर ध्यान केंद्रित करें

 

भावातीत ध्यान में आमतौर पर एक विशेष मंत्र का मन ही मन दोहराव किया जाता है। ध्यान रखें कि पारंपरिक भावातीत ध्यान में मंत्र प्रशिक्षित शिक्षक द्वारा व्यक्तिगत रूप से दिया जाता है। स्वयं किसी भी सरल ध्वनि या शब्द का शांत मन से दोहराव शुरुआती अभ्यास के रूप में किया जा सकता है।

  •  विचार आने दें

 

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यदि ध्यान के दौरान मन में विचार आएं तो उन्हें रोकने या हटाने की कोशिश न करें। जब ध्यान भटक जाए तो धीरे-धीरे फिर से मंत्र पर लौट आएं।

  • 15 से 20 मिनट तक अभ्यास करें

रोजाना सुबह और शाम लगभग 15 से 20 मिनट का अभ्यास लाभकारी माना जाता है।

 

  • भावातीत ध्यान के संभावित फायदे

नियमित अभ्यास से कई लोगों को निम्नलिखित लाभ महसूस हो सकते हैं—

  • मानसिक तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।
  • मन को शांत और स्थिर रखने में सहायक हो सकता है।
  • एकाग्रता और फोकस बेहतर हो सकता है।
  • नींद की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है।
  • दैनिक कार्यों में सकारात्मकता और ऊर्जा महसूस हो सकती है।
  • भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

ध्यान रखें कि इन लाभों का अनुभव व्यक्ति-व्यक्ति पर अलग हो सकता है और इनके समर्थन में उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण सभी दावों के लिए समान रूप से मजबूत नहीं हैं।

  • ध्यान करते समय रखें ये बातें
     
  • खाली या हल्के पेट ध्यान करना बेहतर माना जाता है।
  • शुरुआत में कम समय से अभ्यास शुरू करें।
  • ध्यान के दौरान शरीर पर अनावश्यक दबाव न डालें।
  • नियमित अभ्यास करने से बेहतर अनुभव मिल सकता है।

यदि ध्यान करते समय बेचैनी या असामान्य परेशानी महसूस हो, तो अभ्यास रोककर विशेषज्ञ से सलाह लें।

  • क्या सभी लोग भावातीत ध्यान कर सकते हैं ?

अधिकांश स्वस्थ वयस्क इस तरह का ध्यान कर सकते हैं। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या वह किसी विशेष उपचार के दौर से गुजर रहा है, तो ध्यान शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।

निष्कर्ष

भावातीत ध्यान मन को शांत करने और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने का एक लोकप्रिय तरीका है। यदि इसे नियमित रूप से सही विधि के साथ किया जाए, तो यह तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इसे किसी चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार के साथ ध्यान का अभ्यास बेहतर मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है।

अस्वीकरण  –   यह आर्टिकल केवल स्वास्थ्य जागरूकता के लिये है अगर आपको स्वास्थ  से जुड़ी कोई भी समस्या है तो  अपने डॉक्टर से परामर्श करे।