सारिका झा।
जब भी गर्मी से सर्दी हो , या सर्दी से गर्मी खासकर दिल्ली जैसे महानगर में मौसम बदलने पर ज्यादातर लोग बीमार पड़ते हैं। नाक – कान और गला मौसम बदलने पर सबसे अधिक प्रभावित होता है। कैसे व्यक्ति अपने इन महत्वपूर्ण अंगो का ध्यान रख सकता है , और इससे जुड़ी ऐसी कौन सी बातें हैं , जिनके लिये जागरूक होने की आवश्यकता है ,
इसकी जानकारी सीनियर ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. व सर्जन डॉ. बी. के अग्रवाल ने विकल्प मीमांसा से बात करते हुए अपनी सलाह दी है।
डॉ. अग्रवाल के अनुसार कभी भी मौसम बदलने पर लोग बीमार पड़ते हैं , इसका पहला कारण है , लोग गर्मी का जरा अहसास होने पर ही कम कपडे पहनना शुरू कर देते हैं। दूसरा सबसे बड़ा कारण यहां का प्रदूषण स्तर है। अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति , गर्भवती महिलाएं एवं छोटे बच्चों को मौसम बदलने पर अपना विशेष ध्यान रखना चाहिये। वहीं प्रदूषण के मामले में यह बात सबको पता है कि सुबह के समय प्रदूषण स्तर सबसे ज्यादा होता है , इसलिये मॉर्निंग वॉक के लिये घर से देरी से निकलना , मास्क पहनना , और नाक में तेल लगाकर रखना जरूरी है। इसके अलावा ब्रिदिंग एक्सरसाइज ,योगा , नीति वास आदि करना चाहिये। साथ ही घरेलू नुस्खे जैसे – तुलसी , काढ़ा दूध हल्दी आदि का प्रयोग करना चाहिये।
घरेलू नुस्खों का प्रयोग कई बार काफी लाभप्रद होता है। इन्हें आप मेडिकल साइंस से हटा ही नहीं सकते। हमेशा यह बचाव व इलाज के लिये प्रयोग होता रहेगा। योगा से सांसों से जुड़ी कितनी बीमारी ठीक रहती है। मुंह से लेकर ह्र्दय तक श्वास प्रक्रिया सही रहती है। कोविड के दौरान ज्यादातर लोग इन्हीं का प्रयोग करके स्वस्थ रहे।
हेडफोन के अधिक इस्तेमाल से जुड़े सवाल पर डॉ. कहते हैं कि आज की जीवनशैली में हेडफोन का सीमित इस्तेमाल तो जरूरत है , मगर इसके अत्यधिक प्रयोग से कान प्रभावित होता है। वहीं , दूसरी ओर जो लोग हमेशा मोबाइल फोन का यूज करते हैं , लैपटॉप का झुककर यूज करते हैं , उनमें सर्वाईकल स्पोनलाइटिस भी काफी होते हैं। इसके अलावा , अधिक देर तक स्क्रीन पर नजरें डालने से दिमाग और आँखों से जुड़ी समस्या हो सकती है।
इएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर और सर्जन डॉ. बी के. अग्रवाल ने सरकार से अपील की कि किसी भी शादी समारोह , पार्टी या आयोजन में बजने वाले डीजे , स्पीकर की तेज आवाज को कम करने के लिये इसकी एक सीमा निश्चित करें , क्योंकि कई लोगों के कान के पर्दे इन तेज आवाज से फट जाते हैं , सुनने की क्षमता कम हो जाती है ,और व्यक्ति के कान को बहुत नुकसान होता है।
सरकार को सख्ती के साथ इस नियम लो लागू करके लोगों को पालन करने के लिये निर्देशित करना चाहिये।
ईएनटी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें , जिसके लिये लोगों को जागरूक रहने की आवश्यकता होती है –
1 वैक्स के बारे में लोगों में काफी भ्रम हैं। वैक्स कान के सामान्य स्त्राव हैं , इसके लिये घबड़ाने की आवश्यकता नहीं है। समय – समय पर थोड़ा – बहुत स्त्राव होता है। बड का प्रयोग नहीं करें। खासकर बच्चों के कान में हाथ नहीं लगाना चाहिये। किसी ईएनटी सर्जन को दिखायें । कई लोग बच्चों का स्वयं बड से कान साफ करते हैं। ऐसा करते हुए उनके कान में इन्जयरी भी हो जाती है। जबकि हर व्यक्ति में लगभग 80 प्रतिशत वैक्स बनते रहती हैं , और निकलते रहे हैं। यह सामान्य रूप से कान सफाई की प्रकिया चलती रहती है। कुछ लोगों में 20 से 25 प्रतिशत तक वैक्स रूक सकती है , जिनकी रूकती है उनके कान की सफाई सर्जन करते हैं। इसे खुद करने से बचना चाहिये।
- कान में तेल का इस्तेमाल नहीं करें। इससे फंगल इंफेक्शन हो सकता है।
- तेज आवाज जैसे – डीजे , बैंड – बाजा ,पटाखे आदि के शोर से दूर रहना चाहिये।
- स्वास्थ्यवर्धक भोजन करें।
- सिंगिग के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिये यह जरूरी है कि प्रोफेशनल आवाज को यूज करें।
- बेवजह अपनी आवाज खराब न करें। योगा करें। स्टीम का यूज करें , क्योंकि यह बेहतरीन है। यह नाक और गला , दोनों के लिये अच्छा है।
- गले और नाक खराब होने का एक और कारण एसिडिटी है। जब एसिडिटी पेट से ऊपर की तरफ आता है , वो गले को जला देता है। इसके लिये डाइट हाईजीन और वोकल हाईजीन दोनों को ठीक रखने की आवश्यकता होती है। ऊंची आवाज में बात नहीं करना , चीखना – चिल्लाना नहीं और अपनी डाईट को सही रखने जैसे – अधिक तले – भुने खाने से परहेज करना , अधिक देर तक खाली पेट नहीं रहना हर व्यक्ति के जीवन में नियमित रूप से लागू होना चाहिये।
कई बार साइनसाईटिस में नाक से नीचे गले में बलगम आने से भी गला खराब हो सकता है। इसके साथ ही अगर नाक बंद है तो आवाज बदली लग सकती है।
कई बार जोर से बोलने , चिल्लाने से वोकल कॉर्ड में दाने बन जाते हैं , जब सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
अस्वीकरण – यह आर्टिकल केवल जागरूकता के लिये है अगर आपको नाक कान व गले से संबंधित कोई भी समस्या है तो आप अपने डॉक्टर से परामर्श करे।