जनसंख्या नियंत्रण के अचूक नुस्खे।

 

हिन्दुस्तान के विरोधी दलों के लक्षण ठीक नहीं हैं। सरकार जो भी करे , अच्छा या बुरा , विपक्षी अवश्य ही विरोध करेंगे। सभी जानते हैं कि भारत की सबसे बड़ी समस्या जनसंख्या में वृद्धि है। जनसंख्या रोकने के लिये सरकार अरबों – अरबों रुपये लूटा रही है। चालाक दोनों हाथों से बटोर रहे हैं लेकिन जनसंख्या कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। कभी – कभी लगता है , कोई इन्तजाम नहीं करती है।

पादरी माल्थस के मानक पुत्रों की चिल्लाहट जारी है कि अर्थतंत्र को बचाने के लिये जनसंख्या में कमी आवश्यक है। सौ वर्ष पुराने सिद्वान्त पर अमल जारी है।

पहले जनसंख्या में कमी करने के लिये प्रकृति स्वयं अपना इन्तजाम करती थी। हैजा गाँव में आया आधा गाँव साफ , प्लेग आया गाँव का गाँव साफ। चेचक आया परिवार का परिवार साफ। इसी लिये पहले जनसंख्या हिन्दुस्तान के लिये कोई समस्या नहीं थी। जब संख्या बरकरार रहे इसलिये बुजुर्ग लोग आशीष देते थे ,, दूधो नहाओ पूतो फलों ,,, एक से इक्कीश हो जाओ।

प्रकृति के कामों में हस्तक्षेप हुआ। गाँव – गाँव में अस्पताल खुले , पम्प से शुद्ध पानी मिलने लगा। परिणाम हुआ कि हैजा – प्लेग चेचक आदि रोगों का सफाया हो गया। मृत्युदर में कमी आयी। जनसंख्या  में वृद्धि होती चली गयी। अर्थतंत्र के गड़बड़ होने से जनतंत्र भी गड़बड़ होता चला गया।

लालू यादव , राबड़ी देवी सदृश लोगों ने नौ – नौ बच्चों को पैदा करके गड़बड़ी की शुरुवात कर दी। वी. वी. गिरी साहब भी मात्र 15 बच्चों के बाप थे। गिरिजी मजदूर नेता थे , मजदूरों को मनोरजंन के लिये सिर्फ पत्नी ही होती है , इसलिये मजदूरों को बच्चे अधिक होते हैं। यह बात बिहार विधान सभा में बिहार के मुख्यमंत्री के. बी. सहाय ने विपक्ष के नेता को कहा था।

बहरलाल – प्रकृति के बाद जनसंख्या नियंत्रण करने के तरीके जो जानते हैं उन्हें ही जनता ने चुनकर तख्त पर बैठाया है। जनसंख्या नियंत्रणाधीन  करने का उनका पुराना , नुस्खा है।

पहले विपक्ष में रहकर सरकार को मदद करते थे और अब वे स्वयं सरकार हैं खुलकर जनसंख्या नियंत्रण कर रहे हैं। गुजरात मंत्री उवाच रहे हैं। आप फरमाते हैं कि क्रिया की प्रतिक्रिया है। लोगों को न्यूटन का सिद्धान्त पढ़ा रहे हैं।

गाँधी जी , इंदिरागांधी से भी बड़े पेड़ थे। उनकी हत्या के बाद प्रतिक्रिया नहीं हुई न गोडसे जैसे ब्राह्मण मारे गये और न गोडसे की पार्टी का कोई भी व्यक्ति मारा गया।

सम्म्भवत; सरकार के सामने उस समय जनसंख्या कोई समस्या नहीं थी। लेकिन एक बात समझ में नहीं आ रही है कि गोधरा में नृशंस हत्या हुई।

इस कांड के बाद मानवता कराह उठी लेकिन उसकी कोई प्रतिक्रिया वहाँ नहीं हुई। दूसरी जगहों पर लगातार दो महीने से जनसंख्या हटाओ ऑपरेशन जारी है। सरकार के मनोनुकूल कार्य जारी है इसलिये प्रधानमंत्री गृहमंत्री आदि सारे लोग , गुजरात की प्रशंसा कर रहे है।

उपर्युक्त यह कहानी परत – दर – परत पुस्तक लेखक सिद्वेश्वर नाथ पांडेय के द्वारा लिखी गई है। यह विकल्प – मीमांसा के संपादकीय सलाहकार भी रहे है। अब वह दिवंगत है।