समस्या का निदान

 

रेलगाड़ी में बैठा अखबार पढ़ रहा था। बगल में चार – पाँच लोग जो सम्भवत; सचिवालय के कर्मचारी थे , आपस में बातें कर रहें थे। उनकी बातों से अखबार पढ़ने में बाधा पैदा होने लगी इसलिये अखबार में आँख गड़ाये हुए ही उन लोगों की बातों को सुनने लगा।

उनमें से एक ने कहा कि छोड़िये ये सारी बातें , कहिये बेटी की शादी ठीक हो गई ? दूसरे सज्जन ने कहा , कहाँ हुई ,,

पहले ने पूछा क्यों ,,
दूसरे ने कहा , वही पुराना राग एक लाख का दहेज चाहिये।,, अब तुम्हीं बताओं , कहाँ से लाऊं इतने रूपये। मेरी तनख्वाह तुम से छुपी हुई है

नहीं , बेटा भी एम ए पास करके घर बैठा है। कहीं नौकरी लग नहीं रही है। बेटी पढ़ ही रही है। पढ़ाई छुड़ा कर घर बैठाने पर और जग हंसाई होगी। उससे छोटा वाला पढ ही रहा है।

बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च किसी तरह से चल रहा है। हर माह कुछ न कुछ उधार हो ही जाता है। अब दहेज के लिये पैसे कहाँ से लाऊं ?
पहले ने कहा , हाँ बात तो ठीक ही कह रहे है।
दूसरे – लोग अपने घर में आराम करने जाते हैं और मुझे घर काटने दौड़ता है। घर में  घुसते  ही पत्नी का ताना अलग शुरू हो जाता है।

बेटे की चुप्पी कलेजे में उतर जाती है। बेटी को देखकर चिंता अलग होने लगती है। सोंचते – सोंचते रात की नींद हराम हो जाती है। रात में चोर की तरह जाता हूँ , और सबेरे काम का बहाना बना कर भाग आता हूँ।

साथ के सारे लोग चिंतामग्न हो गये। कुछ क्षण की चुप्पी के बाद एक ने कहा कि आप की परेशानी का एक ही निदान सम्भव है।
सब उत्सुक होकर उसकी ओर देखने लगे। मेरी भी उत्सुकता बढ़ गई। मुझे लगा कि कहेगा बड़े बाबू लड़की की शादी की चिंता मत कीजिये।

एक लड़का है जो मेरा भाई , बेटा , भगीना भतीजा या कुछ भी हो सकता है , उससे शादी का प्रस्ताव रखेगा।
लेकिन उससे कहा कि आप आत्महत्या कर लीजिये। 96 हजार बीमा का मिलेगा। पेंशन ग्रेच्युटी वगैरह मिलाकर पचास हजार और मिलेगा। बेटी की शादी भी हो जायेगी और बेटे की नौकरी भी लग जायेगी।
तब तक सचिवालय हाल्ट पर गाड़ी रुकी और सारे लोग उतर गये।