गजल ; स्वागत

  बैठिए पास मेरे करीब आइए इस तरह दूर रहके न तरसाइए। देखिये कब से फैली…

भीषण बाढ़ विभीषिका…!

लाखों परिवार अपने ही घरों में कैद, भीषण बाढ़ विभीषिका झेलते खेद।        …