उन्हें यकीन है अपनी समझदारी पर,
हमें यकीन है अपनी वफ़ादारी पर।
उन्होंने रिश्तों को हिसाब से निभाया,
और हमने हर रिश्ता दिल से निभाया।
वो कहते रहे, कि वक्त सब बदल देता है,
शायद इसलिए उन्होंने हमें भी बदल दिया।
मगर हम आज भी वहीं खड़े हैं,
जहाँ उन्होंने हमारा साथ छोड़ दिया था।
हमें यकीन है कि वो खुश होंगे,
गैरों की महफ़िल में मुस्कुराकर।
नई हँसी, नए चेहरे, नए रिश्ते…
शायद अब उनको हमारी जरूरत ही महसूस नहीं होती।
लेकिन हमारी हर दुआ में
आज भी उनका ही नाम आता है।
रब से कभी शिकायत भी नहीं की,
बस इतना कहा—
“मेरे हिस्से के ग़म भी उन्हें कभी न देना।”
कई रातें ऐसी गुज़री हैं,
जब आँखों ने सोना छोड़ दिया,
और यादों ने रोना नहीं छोड़ा।
तकिए ने हमारे आँसू संभाले,
पर दुनिया ने हमारी मुस्कान ही देखी।
हमने चाहा था कि उम्र भर
तुम्हारा हाथ थामे चलें।
मगर किस्मत ने ऐसा मोड़ दिया
कि तुम किसी और राह के मुसाफ़िर बन गए,
और हम यादों के शहर में अकेले रह गए।
अगर कभी किसी शाम
हवा तुम्हें हमारा नाम सुनाए,
अगर किसी पुराने गीत में
हमारी हँसी सुनाई दे,
अगर किसी बारिश की बूंद में
हमारी आँखों का दर्द महसूस हो…
तो बस एक पल के लिए रुक जाना,
मगर हमारी तरफ़ पलटकर मत देखना।
क्योंकि डर है,
तुम्हें देखकर कहीं हमारी अधूरी मोहब्बत
फिर से साँस न लेने लगे।
हमने बड़ी मुश्किल से
अपने टूटे हुए दिल को समझाया है।
तुम खुश रहो…
बस यही हमारी आख़िरी दुआ है,
और पहली मोहब्बत का आख़िरी फ़र्ज़ भी।
उन्हें यकीन रहे अपनी समझदारी पर,
हमें यकीन रहेगा अपनी वफ़ादारी पर।
फ़र्क बस इतना रहेगा—
उन्होंने एक रिश्ता खोया होगा,
और हमने अपनी पूरी दुनिया।
फिर भी…
अगर कभी हमारी याद आए,
तो हमारी तरफ़ मत देखना।
क्योंकि हम आज भी वहीं मिलेंगे,
जहाँ तुम हमें आख़िरी बार छोड़कर गए थे।
हाथों में दुआ लिए,
आँखों में आँसू लिए,
और दिल में सिर्फ़ तुम्हारा नाम लिए।
उपर्युक्त पक्तियां प्रकाश गुप्ता द्वारा लिखी गई है।
अगर आपकी लेखनी में भी दम है , और उसे दुनिया के सामने प्रदर्शित करना चाहते हैं तो हमारी मेल आईडी vikalpmimansa@yahoo.in पर भेजे।
