
हैं अश्रू धरोहर , मीत प्रिये ,
हारी बाजी की जीत प्रिये।
श्रुति दंत कथाओं में लिखी ,
हर प्रीत की ये ही रीत प्रिये।
है प्रीत राधिके , छल कान्हा ,
मीरा का हर इक पल कान्हा।
है श्रोभ वियोग की यह गाथा ,
अंसुवन से लिखे गीत प्रिये।
हैं अश्रू धरोहर —-
उर्मिल बन त्याग तपोवन सा ,
ज्यों सर्प पगे मृदु चंदन सा।
हैं सुर सारे उखड़े – उखड़े ,
बिरहा के सब संगीत प्रिये।
हैं अश्रू धरोहर ,
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अमित तिवारी 10 वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता एवं लेखन क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों वरन अध्यात्म, शिक्षा, तकनीक, आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में गहन जानकारी रखते हुए इन्होंने हमेशा जीवन को सकारात्मक दिशा की ओर मुड़ने के लिये लोगों को प्रेरित किया है। वर्तमान में यह एक प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र में कार्यरत हैं।
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