पूजा पपनेजा।
दिल्ली में बहुत सी ऐसी प्रेरक कहानियाँ है. जो किसी भी व्यक्ति के जीवन को बदल सकती है ।
- प्रीति सक्सेना की कहानी में क्या है खास ?
ऐसी ही एक कहानी प्रीति सक्सेना की है। उत्तर प्रदेश की मूल निवासी प्रीति दिल्ली में रह रही थी। माता पिता व तीन भाई बहनों के साथ पल रही प्रीति घर की आर्थिक स्थितियों से बचपन से ही जूझ रही थी। पिता सिलाई का काम करते थे , जिससे इनके घर का खर्चा चलता था। इसी बीच लगभग 11 साल की प्रीति ने भी पिता की मदद करने के लिये सिलाई सीखना शुरू कर दिया। जैसे -जैसे वह बड़ी होती गई अपनी पढ़ाई के साथ – साथ सिलाई करते हुए पिता का सहयोग करती रही।
पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद 2022 में प्रीति की शादी हो गई जिससे वह अपना घर परिवार बनाने में व्यस्त हो गई। जीवन यूँ ही चल रहा था कि एक दिन प्रीति के पति अश्विनी सक्सेना ने सलाह दी कि अपने हुनर को एक व्यवसाय का रूप दे। तब प्रीति ने इसे गंभीरता से नहीं लिया लेकिन घर में खाली वक्त होते ही पति की बातें उसके दिमाग में घूमने लगी। एक दिन फैसला कर लिया कि इस कला के साथ ही कुछ करना है , और अपना नाम बनाना है।
समस्या थी कि शुरुआत कैसे करे ? प्रीति ने घर के पुराने कपड़ो से सैंपल बैग्स बनाने शुरू किये और उसे अपने जान- पहचान के लोगों को भेजा। अधिकतर लोगों ने इस काम को पसंद किया और आगे बढ़ने की सलाह दी। अब प्रीति का आत्मविश्वास बढ़ने लगा । अपने बनाये बैग्स के सैंपल को ऑनलाइन मार्किट में भेजने लगी। यह एक ऐसा कदम था जो प्रीति को एक एंटरप्रेन्योर बनने में काफी मददगार साबित हुआ।
एक तरफ ऑनलाइन मार्किट में बैग्स की मांग बढ़ रही थी तो वही आंगनवाड़ी केंद्रों और आस- पड़ोस के लोगो से भी बैग्स के ऑडर मिलने लगे।
इस तरह सुंदर डिज़ाइन , और कपड़ों से बने बैग्स ने गृहिणी प्रीति को एक महिला उद्यमी के रूप में स्थापित किया है। अपने इस काम के साथ वह अपना घर भी सभांल रही है।
नोट – आप अपनी शिक्षा जरूर पूरी करे लेकिन किसी ना किसी हुनर को भी सीखना उतना ही जरूरी है जिसमे एक दिन आपका वर्तमान और भविष्य दोनों बनाने की क्षमता हो सकती है प्रीति सक्सेना की कहानी इसी का एक उदाहरण है।
अगर आपकी कहानी भी किसी को प्रेरणा दे सकती है तो अपनी डिटेल व्हाट्एप्प नंबर—- 9217454441 पर हमें भेजें।
