जाने क्यूँ सच कभी – कभी

जाने क्यूँ सच कभी – कभी कमजोर सा मालूम होता है , मन मेरा भी कभी…

बहुत अब हो गया किस्सा रूठने मनाने का

बहुत अब हो गया किस्सा मनाने रूठ जाने का। फकत अब वक्त आया है किसी ताज़ा…

प्रेम कविता ; जिनकी मोहब्बत हमारे लिये कभी सहारा थी——– उसी ने हमें जिंदगी में अकेला छोड़ दिया ।

जिनकी मोहब्बत हमारे लिये कभी सहारा थी। उसी ने हमें जिंदगी के सफर पर आकर तन्हा…

मूर्ख बातूनी कछुआ

उदयराज सिंह एक तालाब में एक कछुआ रहता था , और उसी तालाब में दो हंस…

उसको कामयाब बनाने की ख्वाहिश अधूरी थी मेरी

उसको कामयाब बनाने की ख्वाहिश अधूरी थी मेरी मेरी वह अधूरी इच्छा पूरी हुई । जब…

बस इतना हो , अच्छा हो

बस इतना हो , अच्छा हो उसको लिखना , उसको पढ़ना , उसमे होना , जी…

जीवन के रंग अलसाए हैं

तुम्हारे साथ न होने से समंदर के गहराई जैसा दर्द का एहसास सचमुच मेरा जीवन कितना…

बाबुल का प्यार

जब एक लड़की ब्याह कर दूसरे घर की बहू और किसी की जीवनसंगिनी बनती है सब…

मेरे हिस्से की धूप

कभी – कभी सोचता हूँ क्यों किसी के हिस्से की घूप किसी और के आंगन में…

सत्य को स्वीकार शायद

आज फिर से आजकल की, बातें याद आने लगी। आज फिर बातें वही , रह –…