पूजा पपनेजा।
सिकंदर राय की कहानी में क्या है खास ?
यह कहानी सिकंदर राय की है उनकी उम्र 25 साल है वह रहने वाले मूल निवासी पंजाब के है । उनकी जिंदगी संघर्षो से भरी है लेकिन उन्होंने कभी अपने जीवन में हार नहीं मानी।
जब सिकंदर मात्र 2 वर्ष के थे तभी उनके पिता का निधन हो जाता है। उसके बाद उनकी माँ पर अपने तीनों बच्चों की जिम्मेदारी आ जाती है। घर की कमजोर व आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनकी माँ काम करना शुरू कर देती है , वही उसके साथ वह अपने तीनों बच्चों का पालन – पोषण भी करती है।
वही सिकंदर भी जैसे – जैसे बड़े होने लगते है वह भी अपनी माँ के संघर्ष को देखकर अपने घर की परिस्थितियों व हालातों को समझने लगते है।
जिसके बाद वह मात्र 8 साल की उम्र से ही काम करना शुरू कर देते है उसके साथ वह घर आकर अपनी पढ़ाई भी पूरी करते है वही अपनी माँ का साथ भी देते है।
लेकिन यह सफर उनके लिये आसान नहीं होता उनका जीवन जैसे – जैसे आगे बढ़ने लगता है उनके जीवन मे आर्थिक परेशानियाँ भी बढ़ने लगती है ।
उसके बाद सिकंदर अपने घर के हालातों को देखते हुए एक शिक्षक बनने का निर्णय लेते है उसके लिये वह दिन – रात पढ़ाई भी करते हैं। इसके साथ वह अपनी पढ़ाई का खर्चा निकालने के लिये फैक्ट्रियो में भी काम करते है।
इस तरह से उनकी शिक्षा पूरी होने लगती है , वह एक शिक्षक बन जाते है इसके बाद घर की आर्थिक परिस्थितियाँ बेहतर होने लगती है। इसके अलावा अब सिकंदर सरकारी नौकरी की भी तैयारी कर रहे है। अपने घर की परिस्थितियों को बेहतर बनाने के लिये फ़ूड डिलीवरी का भी काम कर रहे है।
अब भी अपने जीवन में अपनी परिस्थितियों से लड़ रहे है अपने जीवन में हार नहीं मान रहे है। फिलहाल सिकंदर अब चंडीगढ़ में रहते है । वही के एक प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाते है।
- सिकंदर की कहानी में हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
सिकंदर की कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि आज के समय में हर बच्चे को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास होना चाहिए हालात कैसे भी हो उसे कभी हार नहीं मानना चाहिए।
वही इस कहानी में उनकी माँ की बात करे तो उनके लिये भी अपने जीवनसाथी को खोना आसान नहीं था फिर भी उन्होंने ने अपने गम को भूलकर अपने बच्चों का सोचा इसलिए हर माँ को सिकंदर की माँ की तरह हिम्मत रखनी चाहिए।
